Kangra News: हिमाचल प्रदेश में ‘लीची का गढ़’ माने जाने वाले सुलाह क्षेत्र ने इस बार नया रिकॉर्ड बनाया है। अपनी खास मिठास के लिए प्रसिद्ध सुलाह की लीची अब सात समंदर पार विदेशी बाजारों तक पहुंच गई है। इस साल हुई बंपर पैदावार ने स्थानीय बागबानों और बड़े व्यापारियों के चेहरे खिला दिए हैं।
लीची के इस चालू सीजन से सुलाह क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को जबरदस्त रफ्तार मिली है। इस कारोबार से बागबानों और व्यापारियों के साथ-साथ आम ग्रामीणों को भी बेहतरीन कमाई का मौका मिल रहा है। पिछले साल भीषण ओलावृष्टि के कारण लीची की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी, जिससे भारी नुकसान हुआ था।
अनुकूल मौसम से सुधरे हालात, विदेशों से आई भारी डिमांड
इस साल प्रकृति मेहरबान रही और सुलाह में लीची की शानदार फसल तैयार हुई। इस बंपर पैदावार ने बागबानों को उनकी पुरानी मेहनत का पूरा फल दिया है। दिल्ली से आए बड़े ठेकेदार दिलशान ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले इस बार लीची का स्वाद और गुणवत्ता दोनों ही बहुत शानदार हैं।
सुलाह की लीची की मांग दिल्ली, कोलकाता, बिहार और हिसार जैसे देश के कई बड़े शहरों में लगातार बनी हुई है। व्यापारी इन बागीचों से लीची तोड़कर उसकी ग्रेडिंग करते हैं। इसके बाद माल दिल्ली भेजा जाता है। वहां से इस खास लीची को कनाडा, ऑकलैंड और अमेरिका जैसे देशों में एक्सपोर्ट किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों को मिला बंपर रोजगार, कारोबार हुआ तेज
लीची का सीजन शुरू होते ही हिमाचल के ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापारिक रौनक काफी बढ़ गई है। स्थानीय युवाओं और मजदूरों को लीची की तोड़ाई, पैकिंग और ढुलाई के काम में बड़े पैमाने पर रोजगार मिल रहा है। बाहरी राज्यों के कारोबारी भी यहां लगातार डेरा जमाए हुए हैं।
पंजाब, दिल्ली और हरियाणा के व्यापारी सीधे बागीचों से लीची खरीद रहे हैं। वे इस प्रीमियम फल को देश की बड़ी मंडियों तक पहुंचाकर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। सुलाह की लीची के इस वैश्विक सफर ने स्थानीय स्तर पर व्यापार के नए रास्ते खोल दिए हैं, जिससे हर वर्ग खुश है।

