Himachal Pradesh News: राज्य में हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम के चालकों और परिचालकों की प्रस्तावित हड़ताल आखिरकार समाप्त हो गई है। सचिवालय में सरकार और कर्मचारी यूनियन के पदाधिकारियों के बीच हुई मैराथन बैठक में एक सहमति बन गई। दोनों पक्षों ने समझौते को हरी झंडी दे दी है।
शिमला में अतिरिक्त मुख्य सचिव परिवहन आरडी नजीम और निगम के प्रबंध निदेशक निपुण जिंदल की मौजूदगी में यह बैठक तीन घंटे चली। चालक संघ के अध्यक्ष मान सिंह ठाकुर ने बताया कि सरकार ने उनके हालिया तबादलों को रद्द करने और लंबित देयकों का भुगतान किस्तों में करने का भरोसा दिया है।
अस्थाई तौर पर बुलाए गए हजारों बेरोजगार युवाओं को लगा बड़ा झटका
इस बीच सबसे बड़ा सवाल उन बेरोजगार युवाओं के भविष्य का है, जिन्हें सरकार ने हड़ताल से निपटने के लिए बुलाया था। बुधवार को डिपो स्तर पर ₹1500 की दैनिक दिहाड़ी पर अस्थायी भर्ती के लिए 9,000 से अधिक चालक विभिन्न जिलों से ड्राइविंग टेस्ट देने पहुंचे थे।
निगम के 31 डिपो में कुल 656 पदों के लिए दोपहर बाद ड्राइविंग ट्रायल आयोजित किए गए थे। शाम होते-होते मुख्य कर्मचारियों की हड़ताल खत्म होने की खबर मिलते ही इन अस्थाई आवेदकों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। युवाओं ने इस पूरी प्रक्रिया को अपने साथ एक बड़ा धोखा बताया है।
पहले ही दिन आधे समय के मानदेय के रूप में मिले 750 रुपये
एचआरटीसी के मंडी डिवीजन के डीएम उत्तम सिंह ने बताया कि सरकार की नीति के अनुसार उनके डिवीजन में 150 चालकों को अस्थाई रूप से नियुक्त किया गया है। इन युवाओं को पहले दिन काम के एवज में आधे दिन का वेतन यानी ₹750 प्रदान कर दिए गए हैं।
अफसरों के मुताबिक यह अस्थायी नियुक्तियां आगामी छह महीनों के लिए वैध रहेंगी। इस समय अवधि के दौरान परिवहन निगम को जब भी आवश्यकता महसूस होगी, इन ड्राइवरों की सेवाएं ली जा सकेंगी। हालांकि युवाओं का कहना है कि जॉइनिंग लेटर न मिलने से उनकी नौकरी सुरक्षित नहीं है।
सोशल मीडिया पर आई फनी मीम्स की बाढ़, विपक्ष ने भी घेरा
इस अजीबोगरीब घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर सुक्खू सरकार की खिंचाई शुरू हो गई है। लोग मजेदार मीम्स साझा कर तंज कस रहे हैं। इंटरनेट यूजर्स ने लिखा कि इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है, जहां चालक सुबह भर्ती हुए और शाम को सीधे रिटायर हो गए।
सोलन वर्कशॉप के बाहर ट्रायल के दौरान एक अस्थाई चालक द्वारा बस को गेट से टकराने का वीडियो भी वायरल हो रहा है। इस मुद्दे पर राजनीति भी गरमा गई है। सुंदरनगर से भाजपा विधायक राकेश जम्वाल ने भी इस नीति को लेकर प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है।

