Himachal News: हिमाचल प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में अब विकास कार्यों को एक नई रफ्तार मिलेगी। राज्य की सभी नवनिर्वाचित 3754 पंचायतों में नई ग्राम सरकारों ने अपना कार्यभार पूरी तरह संभाल लिया है। पूरे प्रदेश में पंचायती राज संस्थाओं का कार्यकाल एक समान रखने के लिए राज्य सरकार ने यह बड़ा कदम उठाया है।
शनिवार को प्रदेश की 3754 ग्राम पंचायतों, 92 पंचायत समितियों और 12 जिला परिषदों की पहली बैठक एक साथ आयोजित की गई। प्रशासन ने एकरूपता लाने के लिए लाहौल-स्पीति और चंबा के पांगी क्षेत्र की 56 पंचायतों का कार्यकाल समय से 113 दिन पहले ही समाप्त कर दिया था।
पूरे प्रदेश की पंचायतों का कार्यकाल अब एक समान रहेगा
इन सभी त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं का नया कार्यकाल अब 26 जून 2031 तक निर्धारित किया गया है। दूसरी तरफ, कुल्लू जिले की चार विशेष पंचायतों का चुनाव साल 2027 में अलग से करवाया जाएगा। समय से पहले भंग हुई 56 विकास खंड की पंचायतों में भी जल्द नए चुनाव होंगे।
सभी ग्राम पंचायतों में नवनिर्वाचित प्रधानों ने सबसे पहले अपने वार्ड पंचों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस दौरान गांवों के समग्र विकास की प्राथमिकताओं और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तृत चर्चा की गई। पहली बैठक में मुख्य रूप से विकास के एजेंडे पर गंभीरता से मंथन किया गया।
जुलाई के पहले हफ्ते में ग्रामसभा की बैठकें होंगी
इस शुरुआती बैठक में विकास कार्यों को लेकर फिलहाल कोई औपचारिक प्रस्ताव पारित नहीं किए गए। अधिकारियों के अनुसार, जुलाई के पहले सप्ताह में विशेष ग्रामसभा बैठकें बुलाई जाएंगी। इन बैठकों में विकास का मुख्य एजेंडा तय होगा और विभिन्न ग्रामीण बुनियादी ढांचा योजनाओं को अंतिम रूप दिया जाएगा।
पहली आधिकारिक बैठकों में मुख्य रूप से स्वच्छ पेयजल, पक्की सड़कें, संपूर्ण स्वच्छता, सिंचाई सुविधाओं और मनरेगा कार्यों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही गांवों में शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने पर भी ध्यान दिया गया। कई जगहों पर अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव की बैठकें न होने पर विरोध भी हुआ।

