Himachal News: हिमाचल प्रदेश में दक्षिण-पश्चिम मानसून की दस्तक से पहले ही तेज बारिश ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राजधानी शिमला के ढली क्षेत्र में भारी बारिश के बाद अचानक बाढ़ जैसे हालात बन गए। यहां उफनते नाले से आए मलबे के कारण सड़क किनारे खड़ी तीन गाड़ियां पूरी तरह दब गईं और भारी नुकसान हुआ।
शिमला के मशोबरा में रिकॉर्ड की गई सबसे ज्यादा बारिश
ढली की आशियाना कॉलोनी में मलबे के कारण मुख्य मार्ग पूरी तरह बंद हो गया। इसके बाद स्थानीय लोगों और प्रशासन ने जेसीबी मशीनों की मदद से रास्ता साफ कराया। मौसम विभाग के मुताबिक पिछले चौबीस घंटों में शिमला के मशोबरा में सबसे अधिक चालीस दशमलव पांच मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है।
शिल्लारू में बत्तीस और कुफरी में पंद्रह मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। तेज बारिश के साथ कई इलाकों में अंधड़ भी चला है। नेरी में छियालीस किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलीं। इस प्री-मानसून वर्षा के कारण पूरे प्रदेश के औसतन न्यूनतम तापमान में काफी गिरावट आई है।
जनजातीय क्षेत्र कुकुमसेरी में सबसे कम आठ डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया है। इसके अलावा शिमला शहर में न्यूनतम तापमान सोलह दशमलव दो और मनाली में सोलह डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम में आए इस बदलाव से लोगों को भीषण गर्मी और लू के प्रकोप से बड़ी राहत मिली है।
मौसम विभाग ने तीन जुलाई तक जारी किया अलर्ट
मौसम विज्ञान केंद्र ने राज्य में एक जुलाई से तीन जुलाई तक भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन होने और स्थानीय नदी-नालों का जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका है। प्रशासन ने पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को नदी किनारे न जाने की सख्त सलाह दी है।
हिमाचल प्रदेश में इस साल मानसून अपने तय समय से थोड़ा देर से पहुंचेगा। राज्य में मानसून आने की सामान्य तारीख पच्चीस जून होती है लेकिन इस बार यह जुलाई के पहले हफ्ते में दस्तक देगा। वर्तमान में मानसून मध्य भारत को पार कर तेजी से उत्तराखंड की तरफ बढ़ रहा है।
प्रशासन ने साल 2014 में थलौट में हुए दर्दनाक हादसे को देखते हुए भी अलर्ट जारी किया है। उस समय लारजी बांध से अचानक पानी छोड़े जाने के कारण नदी का जलस्तर बढ़ गया था। उस हादसे में एक स्थानीय नागरिक सहित चौबीस कॉलेज छात्रों की डूबने से मौत हो गई थी।

