मनरेगा की जगह नई वीबी-जीरामजी योजना लागू, अब किसी भी राज्य में 300 रुपये से कम नहीं होगी दैनिक मजदूरी

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New Delhi News: देश में मनरेगा के स्थान पर अब नई विकसित भारत-रोजगार और आजीविका गारंटी योजना (ग्रामीण) यानी वीबी-जीरामजी प्रभावी हो गई है। इसके साथ ही केंद्र सरकार ने ग्रामीण श्रमिकों के लिए नई मजदूरी दरें जारी की हैं। अब देश के किसी भी राज्य में न्यूनतम मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन से कम नहीं होगी।

कम मजदूरी वाले राज्यों को मिलेगा सबसे अधिक आर्थिक लाभ

इस नई व्यवस्था से उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, असम और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों को बड़ा फायदा मिलेगा। सरकार ने इन पिछड़े राज्यों में मजदूरी दरों को 15 से 25 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। इससे राज्यों के बीच लंबे समय से चला आ रहा अंतर अब पूरी तरह खत्म हो जाएगा।

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देश में औसत दैनिक मजदूरी बढ़कर हुई 327 रुपये

नई अधिसूचना के जारी होने के बाद देश की औसत दैनिक मजदूरी 299 रुपये से बढ़कर 327 रुपये से अधिक हो गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि प्रति श्रमिक औसतन 28 रुपये प्रतिदिन की बढ़ोतरी हुई है। राष्ट्रीय स्तर पर यह वृद्धि कुल दस प्रतिशत से अधिक दर्ज की गई है।

सरकार ने तय की राष्ट्रीय स्तर पर न्यूनतम आधार मजदूरी

केंद्र सरकार ने पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर 300 रुपये प्रतिदिन का न्यूनतम बेस रेट तय किया है। इससे पहले कई राज्यों में न्यूनतम दर महज 241 रुपये थी। नई दरों के लागू होने से 21 राज्यों के लाखों ग्रामीण मजदूरों के जीवन स्तर में एक बड़ा और सकारात्मक सुधार देखने को मिलेगा।

रोजगार गारंटी अवधि भी बढ़कर हुई 125 दिन

सरकार ने इस योजना के तहत रोजगार की वैधानिक गारंटी को भी बढ़ाकर 125 दिन कर दिया है। अब पात्र ग्रामीण परिवारों को पहले के मुकाबले हर साल 25 दिन अधिक काम मिलेगा। इस अतिरिक्त काम और बढ़ी हुई मजदूरी से ग्रामीण परिवारों की कुल वार्षिक आमदनी में बड़ी बढ़ोतरी दर्ज होगी।

हरियाणा, केरल और गोवा में सबसे ज्यादा मिलेगी मजदूरी

जिन राज्यों में पहले से मजदूरी अधिक थी, वहां भी आर्थिक मानकों के आधार पर संशोधन किया गया है। अब हरियाणा में नई मजदूरी 409 रुपये, गोवा में 406 रुपये और केरल में 401 रुपये प्रतिदिन मिलेगी। इसके साथ ही कर्नाटक और पंजाब में भी मजदूरी बढ़कर 360 से 409 रुपये हो जाएगी।

ग्रामीण विकास मंत्रालय ने महंगाई को बनाया नया आधार

ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार नई दरें तय करते समय देश के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक और महंगाई को आधार बनाया गया है। इस ऐतिहासिक फैसले से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की क्रय शक्ति मजबूत होगी। स्थानीय बाजारों में मांग बढ़ेगी जिससे पूरे देश के गांवों की अर्थव्यवस्था को नया सहारा मिलेगा।

पुरानी व्यवस्था में विभिन्न राज्यों की मजदूरी दरें

राज्य पुरानी मजदूरी (रुपये में) उत्तर प्रदेश 252 उत्तराखंड 252 बिहार 255 झारखंड 255 मध्य प्रदेश 261 छत्तीसगढ़ 261 पश्चिम बंगाल 268

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