Mumbai News: किसी भी फिल्म की सफलता का पैमाना सिर्फ बॉक्स ऑफिस के आंकड़े नहीं होते हैं। कई बार बेहतरीन फिल्में अपनी रिलीज के दौरान दर्शकों का ध्यान नहीं खींच पातीं, लेकिन समय के साथ वे कल्ट क्लासिक बन जाती हैं। आज हम ऐसी आठ हिंदी फिल्मों की चर्चा करेंगे जिन्हें दर्शकों ने वर्षों बाद सिर-आंखों पर बिठा लिया है।
तमाशा, लैला मजनू और अंदाज़ अपना अपना का सफर
इम्तियाज अली की तमाशा ने आधुनिक युवाओं के बीच गहरा रिश्ता बनाया है, हालांकि रिलीज के समय इसे मिश्रित प्रतिक्रियाएं मिली थीं। वहीं, लैला मजनू को शुरुआत में थिएटर में दर्शकों ने नकारा था, लेकिन सकारात्मक फीडबैक के कारण यह आज काफी चर्चित है। इसी तरह, आमिर और सलमान की अंदाज़ अपना अपना को भी बाद में कॉमेडी मास्टरपीस माना गया।
लक्ष्य, स्वदेस और ढोल की बदली हुई पहचान
फरहान अख्तर की लक्ष्य युद्ध आधारित बेहतरीन फिल्मों में शुमार है, जिसे अब मानक माना जाता है। शाहरुख खान की स्वदेस की गति को लेकर दर्शकों को शिकायत थी, मगर आज यह एक उत्कृष्ट कृति है। कॉमेडी फिल्म ढोल को भी रिलीज के समय सफलता नहीं मिली, लेकिन सोशल मीडिया के दौर में यह फिल्म मीम्स के जरिए काफी मशहूर हुई।
सनम तेरी कसम और तुम्बाड का जादुई असर
रोमांटिक ड्रामा सनम तेरी कसम को रिलीज के दौरान नकारात्मक समीक्षाएं झेलनी पड़ी थीं। बाद में, इसकी कहानी ने दर्शकों के दिलों को जीत लिया और इसे हाल ही में फिर से रिलीज किया गया। सोहम शाह की फिल्म तुम्बाड को भी अपनी असाधारण पौराणिक सेटिंग के कारण वर्षों बाद वह पहचान मिली है, जिसकी वह वास्तव में हकदार थी।

