Crime News: जिस घर में दो दिन पहले ही बेटे का जन्मदिन बेहद धूमधाम से मनाया गया था, वहां रविवार को उसी लाडले का शव पहुंचते ही खुशियों भरा आंगन अचानक चीख-पुकार और गहरे मातम में डूब गया। जवान बेटे के शव से लिपटकर बेबस मां बार-बार बेहोश हो रही थी।
मां की दर्दनाक चीखें सुनकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हो जा रही थीं। वह बिलखते हुए भोजपुरी में कह रही थीं, ‘बेटा, तोहरा खातिर त अभी बहुत कुछ देखे के बाकी रहल, हमके छोड़ के काहे चल गइलऽ…’। इस भयानक हादसे ने पूरे हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है।
यह दर्दनाक घटना गोविंदपुर के पास हुए एक भीषण सड़क हादसे की है। इस हादसे में जान गंवाने वाले रवि कुमार की मौत ने पूरे परिवार को पूरी तरह से झकझोर कर रख दिया है। रवि अपने माता-पिता का इकलौता बेटा था और दो बहनों के बीच पूरे परिवार की उम्मीदों का इकलौता केंद्र था।
पिता का रो-रोकर बुरा हाल और बहनों की बेसुधी
लाडले बेटे को खोने के बाद पिता विपिन कुमार मिश्रा कभी बेटे के बेजान चेहरे को देखते तो कभी आसमान की ओर निहारकर फफक पड़ते। उनके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे। सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाला दृश्य रवि की सगी बहनों का था, जो अपने भाई को देखकर सुध-बुध खो चुकी थीं।
जिस भाई ने कुछ महीने पहले ही अपनी बड़ी बहन की शादी में घर की हर जिम्मेदारी बखूबी निभाई थी, आज उसी भाई को मृत देख बहनें बेसुध पड़ी थीं। बहन रोते हुए कह रही थी, ‘भैया, अब हम राखी पर केकरा हाथ में धागा बांधब, हमारे खातिर लौट आओ।’
घर में चल रही थीं शादी की तैयारियां
मृतक के परिजनों ने रोते हुए बताया कि घर में रवि की शादी की तैयारियां काफी तेजी से शुरू हो चुकी थीं। पूरा परिवार नए सुनहरे सपनों को बुनने में लगा हुआ था। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि घर में शादी की शहनाई बजने से पहले ही इतना बड़ा मातम छा जाएगा।
एक लाचार मां के लिए अपने जवान और इकलौते बेटे को खोने का दुख शब्दों में बयां करना बिल्कुल असंभव है। रवि के अंतिम दर्शन करने के लिए पूरे गांव के लोगों का तांता लगा हुआ था। हर कोई इस हृदय विदारक घटना को देखकर पूरी तरह स्तब्ध था।
हादसे में मारे गए दूसरे युवक के घर में भी कोहराम
इस भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले दूसरे युवक सुनित कुमार के घर का माहौल भी बेहद गमगीन और दर्दनाक बना हुआ था। अपने सबसे छोटे और लाडले बेटे की असमय मौत से उसके वृद्ध माता-पिता पूरी तरह से बदहवास हो चुके थे।
सुनित की बूढ़ी मां बार-बार अपने कलेजे के टुकड़े की तस्वीर को सीने से लगाकर रो रही थीं। परिवार के लोग उन्हें लगातार संभालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बेटे के बिछड़ने का यह असहनीय दर्द किसी भी सांत्वना से कम होने का नाम नहीं ले रहा था।
Author: Raj Thakur


