कानपुर एनकाउंटर: व्यापारी हत्याकांड का मुख्य आरोपी मुठभेड़ में घायल, पुलिस की जवाबी कार्रवाई में लगी गोली

Uttar Pradesh News: कानपुर के बहुचर्चित कपड़ा कारोबारी विजय चौरसिया हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है। मंगलवार शाम गंगा बैराज के पास हुई एक मुठभेड़ के बाद मुख्य आरोपी विशाल गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस की जवाबी फायरिंग में आरोपी के दाहिने पैर में गोली लगी है, जिसके बाद उसे इलाज के लिए एलएलआर अस्पताल में भर्ती कराया गया। आरोपी ने पूछताछ में स्वीकार किया कि उसने एक लाख रुपये के पुराने लेनदेन के विवाद में इस सनसनीखेज हत्याकांड को अंजाम दिया था।

गंगा बैराज पर पुलिस और हत्यारोपित के बीच मुठभेड़

एडीसीपी पूर्वी शिवा सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीमें लगातार आरोपी की तलाश में दबिश दे रही थीं। मंगलवार को पुलिस को सूचना मिली कि हत्यारोपित बिठूर से गंगा बैराज की ओर आ रहा है। घेराबंदी के दौरान आरोपी ने स्कूटर से भागने की कोशिश की, लेकिन रास्ता खराब होने के कारण वह गिर गया। इसके बाद उसने झाड़ियों में छिपकर पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। आत्मरक्षा में पुलिस ने भी गोलियां चलाईं, जिससे आरोपी विशाल घायल होकर पकड़ा गया।

लेनदेन का विवाद या कोई और गहरी साजिश?

पूछताछ के दौरान विशाल गुप्ता ने बताया कि उसने विजय चौरसिया से एक लाख रुपये ब्याज पर लिए थे। रकम न लौटा पाने और विजय द्वारा दबाव बनाए जाने पर उसने सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। हालांकि, मृतक की पत्नी नेहा चौरसिया ने पुलिस के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। नेहा का कहना है कि उनके पति का किसी से कोई व्यक्तिगत लेनदेन नहीं था। वह पुलिस पर असली वजह छिपाने और जांच को गुमराह करने का गंभीर आरोप लगा रही हैं।

हथियार को लेकर पुलिस और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उलझन

इस मामले में हथियार को लेकर अभी भी बड़ा रहस्य बना हुआ है। पुलिस ने मौके से एक तमंचा बरामद करने का दावा किया है, लेकिन पोस्टमॉर्टम की एक्सरे रिपोर्ट कुछ और ही इशारा कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार सिर में फंसी गोली किसी पिस्टल से चलाई गई प्रतीत होती है। आशंका जताई जा रही है कि आरोपी ने चरस तस्कर बाबू सोनकर से पिस्टल ली थी। अब फोरेंसिक जांच ही यह साफ करेगी कि हत्या में तमंचे का इस्तेमाल हुआ या अत्याधुनिक पिस्टल का।

मददगारों और शरण देने वालों पर भी कसेगा शिकंजा

पुलिस ने साफ कर दिया है कि विशाल को भागने में मदद करने वाले सभी लोग अब कानूनी कार्रवाई के दायरे में आएंगे। हत्या के बाद विशाल ने सबसे पहले चरस तस्कर बाबू सोनकर से संपर्क किया था, जिसने उसे छिपने की सलाह दी थी। इसके बाद उसने उन्नाव में अपने दोस्तों के घर शरण ली। एडीसीपी के मुताबिक, जांच में उन सभी दोस्तों को भी सह-आरोपी बनाया जाएगा जिन्होंने अपराधी को जानते हुए भी अपने घर में पनाह दी और पुलिस को सूचना नहीं दी।

होजरी कारोबारी की हत्या का पूरा घटनाक्रम

यह पूरी वारदात बीते शुक्रवार को फीलखाना थाना क्षेत्र में हुई थी। रेस्टोरेंट संचालक विशाल गुप्ता ने कारोबारी विजय चौरसिया को फोन कर मिलने बुलाया और फिर उन्हें अपने साथ स्कूटी पर बैठाकर सवाई सिंह का हाता ले गया। वहां सीढ़ियों पर संघर्ष के बाद विजय के सिर में पीछे से गोली मार दी गई। सीसीटीवी फुटेज में विशाल को वारदात के बाद भागते हुए देखा गया था। पुलिस की चार टीमें लगातार आरोपी के करीब पहुंचने की कोशिश कर रही थीं, जिसका अंत इस मुठभेड़ के साथ हुआ।

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