Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने जेबीटी (JBT) शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने जेबीटी पदों के लिए बीएड (B.Ed) डिग्री धारकों को पूरी तरह अयोग्य घोषित कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने सैकड़ों अभ्यर्थियों द्वारा दायर की गईं पुनरीक्षण याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया।
पोस्ट कोड 721 के नियमों के तहत फैसला
अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि पोस्ट कोड 721 के तहत निर्धारित भर्ती और पदोन्नति नियमों (R&P Rules) के अनुसार कोई भी बीएड डिग्री धारक जेबीटी पद के लिए पात्र नहीं है। सभी याचिकाकर्ता केवल अपनी बीएड डिग्री के आधार पर प्राथमिक स्कूलों में सरकारी नौकरी पाने का दावा पेश कर रहे थे।
याचिकाकर्ताओं ने दी थी मेरिट लिस्ट को चुनौती
प्रार्थियों ने चयन आयोग को निर्देश देने की मांग की थी कि उन्हें बिना किसी शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की शर्त के मेरिट सूची में शामिल किया जाए। याचिकाकर्ताओं ने राज्य चयन आयोग हमीरपुर द्वारा छह सितंबर दो हजार बाईस को जारी उस आधिकारिक अधिसूचना को चुनौती दी थी, जिसने उनकी उम्मीदवारी रद्द कर दी थी।
आयोग ने उन्नीस दिसंबर दो हजार अठारह को जेबीटी भर्ती का मूल विज्ञापन जारी किया था। इसमें जरूरी शैक्षणिक योग्यता पूरी न करने के कारण सीरियल नंबर ग्यारह से ग्यारह सौ उनपचास तक के अभ्यर्थियों को अयोग्य ठहराया गया था। उम्मीदवारों का तर्क था कि वे एनसीटीई (NCTE) के पुराने नियमों के तहत पूरी तरह पात्र हैं।
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देकर दलीलें मंजूर
राज्य सरकार ने कोर्ट में दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही एनसीटीई की उस अधिसूचना को गैरकानूनी और असंवैधानिक घोषित कर चुका है। इस वजह से बीएड डिग्री धारकों की यह याचिकाएं अब कानूनन टिकने योग्य नहीं हैं। हाई कोर्ट ने सरकार के इन तर्कों से पूर्ण सहमति जताते हुए केस को क्लोज कर दिया।


