New Delhi News: भारतीय युवाओं के बीच आईआईटी (IIT) में दाखिला लेना एक बड़े सपने जैसा होता है। अमूमन माना जाता है कि अगर देश के इस प्रतिष्ठित संस्थान से पढ़ाई कर ली, तो शानदार करियर और हाई सैलरी वाली नौकरी पक्की है। लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर एक भारतीय शख्स की बेहद प्रेरणादायक कहानी वायरल हो रही है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर किए गए एक दावे के अनुसार, यह शख्स लगातार दो बार आईआईटी की कठिन प्रवेश परीक्षा में फेल हो गया था। इस बड़ी असफलता के बावजूद, उसने हार नहीं मानी और आज वह दुबई में करोड़ों रुपये का बिजनेस पोर्टफोलियो संभाल रहा है। यह कहानी युवाओं को नया हौसला दे रही है।
छोटे शहर के तानों और असफलता के मानसिक दबाव से उबरकर शुरू किया सफर
शख्स ने अपनी पोस्ट में लिखा कि छोटे शहरों में असफलता केवल एक परीक्षा में हारने तक सीमित नहीं रहती। वहां लोगों के तानें, लगातार होने वाली तुलना और पड़ोसियों की खामोश नजरें इंसान को मानसिक रूप से पूरी तरह तोड़ देती हैं। हर कोई आपको एक अलग और कमजोर नजर से देखने लगता है।
इस असहनीय मानसिक दबाव और नकारात्मक माहौल से बाहर निकलने के लिए उन्होंने अपना होम टाउन छोड़ने का एक बड़ा फैसला किया। इसके बाद उन्होंने दूसरे शहर के एक साधारण सरकारी कॉलेज में दाखिला लिया। यहीं से उन्होंने अपने जीवन और करियर को एक नया मोड़ देने की शुरुआत की।
एजुकेशन लोन लेकर की पढ़ाई, दिन में केवल दो समोसे खाकर काटा संघर्ष का समय
पारिवारिक आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उनके माता-पिता कॉलेज की पढ़ाई का भारी खर्च उठाने में असमर्थ थे। ऐसे में उन्होंने बैंक से एजुकेशन लोन (Education Loan) लिया। अपना दैनिक खर्च चलाने के लिए उन्होंने स्कूली बच्चों को ट्यूशन में गणित पढ़ाना शुरू कर दिया।
शख्स ने बताया कि संघर्ष के दिनों में कई बार पूरे दिन में सिर्फ एक या दो समोसे खाकर ही गुजारा करना पड़ता था। कॉलेज पूरा होने के बाद उन्हें कैंपस प्लेसमेंट के जरिए एक आईटी कंपनी में 20 हजार रुपये महीने की नौकरी मिली। उन्होंने इस मौके को स्वीकार किया, लेकिन उनका लक्ष्य बहुत बड़ा था।
बिना मेंटर के खुद सीखी एआई और मशीन लर्निंग, आज दुबई में हैं वाइस प्रेसिडेंट
उन्होंने अपने करियर को रफ्तार देने के लिए शराब, सिगरेट और हर तरह के भटकाव से पूरी तरह दूरी बना ली। ऑफिस के काम के बाद वे रोज शाम को खुद से इंटरनेट की मदद से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग (ML) की एडवांस टेक्नोलॉजी सीखने लगे।
उनके पास कोई महंगा कोर्स या मेंटर नहीं था। अपनी लगन के दम पर उन्होंने कंपनी के मैनेजर को राजी कर एक एआई प्रोजेक्ट हासिल किया, जो उनके करियर का टर्निंग पॉइंट बना। कुछ ही वर्षों में वे कंपनी के सबसे कम उम्र के वाइस प्रेसिडेंट (VP) बन गए और हाल ही में दुबई शिफ्ट हो गए।

