Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बच्चों के बीच समानता सुनिश्चित करने के लिए शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला किया है। शिक्षा निदेशालय ने नए निर्देश जारी कर स्पष्ट किया है कि अब मिड-डे-मील के समय बच्चों को उनके रोल नंबर के क्रम में बैठाकर भोजन कराया जाएगा।
इस नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य स्कूलों में जाति, धर्म, लिंग या किसी अन्य सामाजिक आधार पर होने वाले भेदभाव को पूरी तरह खत्म करना है। शिक्षा विभाग ने साफ चेतावनी दी है कि यदि कहीं भी भेदभाव की शिकायत सही पाई गई, तो जिम्मेदार कर्मचारियों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।
प्रधानमंत्री पोषण योजना के तहत समरसता बढ़ाने पर जोर
शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश के सभी उपनिदेशकों, स्कूल प्रमुखों और प्रबंधन समितियों को पत्र भेजकर नियमों का कड़ाई से पालन करने को कहा है। विभाग ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री पोषण योजना का मकसद सिर्फ पौष्टिक भोजन देना नहीं, बल्कि छात्रों में आपसी भाईचारे और परस्पर सम्मान की भावना जगाना है।
विभाग के अनुसार, स्कूलों में ऐसा सुरक्षित वातावरण बनना चाहिए जहां हर बच्चा खुद को समान समझे। भोजन वितरण के समय किसी भी छात्र के साथ अलग व्यवहार नहीं होना चाहिए। स्कूल प्रबंधन समितियां, शिक्षक और स्थानीय ग्रामीण मिलकर इस पूरी व्यवस्था की कड़ी निगरानी करेंगे और पारदर्शिता सुनिश्चित करेंगे।
शिक्षा विभाग ने बच्चों के मानसिक और सामाजिक विकास को ध्यान में रखते हुए इस विषय को बेहद गंभीर माना है। योजना की निगरानी के लिए शिकायत निवारण तंत्र को भी काफी मजबूत किया गया है। अब सभी सरकारी स्कूलों के परिसरों में एक विशेष टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा।
छात्र, अभिभावक या आम नागरिक भोजन की गुणवत्ता या किसी भी भेदभाव से जुड़ी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इसके लिए टोल-फ्री नंबर 1800-180-8007 जारी किया गया है। यह हेल्पलाइन हर कार्यदिवस पर सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक काम करेगी। स्कूलों को इस पर मासिक रिपोर्ट भेजनी होगी।

