Mumbai News: बड़े शहरों में बिना सेल्स टीम या ब्रोकर के घर खरीदना बेहद मुश्किल काम है। इसके बदले ब्रोकर खरीदारों से मोटी रकम वसूलते हैं। अमूमन लोग बुकिंग के समय ही ब्रोकरेज दे देते हैं। लेकिन यदि खरीदार बाद में बुकिंग रद्द कर दे, तो क्या वह इस कमीशन राशि की वापसी का दावा कर सकता है।
इस गंभीर विषय पर रेरा कानून साफ कहता है कि प्रॉपर्टी खरीदते समय सिर्फ जुबानी वादों पर भरोसा करना भारी पड़ सकता है। रियल एस्टेट मार्केट में ब्रोकरेज से जुड़े विवाद लगातार बढ़ रहे हैं। रेरा के अनुसार घर खरीदारों को हर भुगतान, एग्रीमेंट और जरूरी जानकारी लिखित दस्तावेजों में ही रखनी चाहिए।
मुंबई के इस बड़े मामले से लें सबक
मुंबई के दो खरीदारों ने एक ही प्रोजेक्ट में दो फ्लैट बुक किए, लेकिन बाद में पैसों की कमी से एक बुकिंग कैंसिल कर दी। इसके बाद बिल्डर ने उनकी रकम से ब्रोकरेज के नाम पर बड़ी कटौती कर ली। खरीदारों का आरोप था कि उन्हें कमीशन की छिपी शर्तों के बारे में पहले नहीं बताया गया था।
खरीदारों ने अपनी 7 लाख रुपये से ज्यादा की रकम वापस पाने के लिए महाराष्ट्र रेरा में शिकायत दर्ज कराई। हालांकि, जरूरी डाक्यूमेंट्स और पुख्ता सबूत न देने की वजह से रेरा ने उनकी यह शिकायत पूरी तरह खारिज कर दी। इस फैसले ने देश के तमाम घर खरीदारों को चौंका दिया है।
रेरा ने क्यों खारिज किया रिफंड का दावा?
रेरा ने दावा खारिज करने के पीछे मुख्य रूप से तीन बड़ी वजहें बताई हैं। पहली वजह यह कि खरीदारों ने बिल और ब्रोकरेज से जुड़े वैध डाक्यूमेंट्स कोर्ट में पेश नहीं किए। लिखित सबूतों के अभाव में रेरा ने कहा कि इस तरह के रिफंड के दावे को सही नहीं ठहराया जा सकता है।
दूसरी वजह यह कि खरीदार यह साबित नहीं कर सके कि संबंधित ब्रोकर रेरा के तहत उस प्रोजेक्ट के लिए अधिकृत एजेंट था। तीसरी वजह में कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि किसी ब्रोकर का रजिस्ट्रेशन खत्म भी हो गया हो, तब भी सिर्फ इसी आधार पर पूरी रकम वापस नहीं मिल सकती है।
क्या कानूनी रूप से वापस मिल सकती है ब्रोकरेज?
रियल एस्टेट एक्सपर्ट्स के अनुसार, अगर किसी खरीदार से ब्रोकरेज फीस छिपाकर ली गई हो या गलत जानकारी देकर वसूली गई हो, तो वह कानूनी तौर पर वापसी का दावा कर सकता है। ऐसे मामलों में पीड़ित खरीदार रेरा या कंज्यूमर कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं।
इसके लिए खरीदारों को बुकिंग फॉर्म, पेमेंट रिसीट्स, ब्रोकरेज इनवॉइस, व्हाट्सएप चैट, ईमेल और कॉल रिकॉर्डिंग जैसे दस्तावेज हमेशा संभालकर रखने चाहिए। महाराष्ट्र रेरा के नियमों के मुताबिक, सेल एग्रीमेंट साइन न होने की स्थिति में बिल्डर बुकिंग रद्द होने पर कुल कीमत का अधिकतम 2% ही काट सकते हैं।
अक्सर खरीदार ब्रोकर के मौखिक वादों पर भरोसा करने और एजेंट का रेरा रजिस्ट्रेशन चेक न करने जैसी बड़ी गलतियां करते हैं। यदि बुकिंग रद्द करने के बाद बिल्डर रिफंड देने से साफ इनकार करे, तो खरीदार को तुरंत कानूनी नोटिस भेजना चाहिए या रेरा में शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
Author: Adv Anuradha Rajput


