Gujarat News: ग्लोबल फ्यूल क्राइसिस और गैस की किल्लत के बीच भारतीय ऊर्जा क्षेत्र से एक बड़ी खबर आ रही है। सरकारी क्षेत्र की नवरत्न कंपनी एनएलसी इंडिया लिमिटेड (NLCIL) और देश की सबसे मूल्यवान निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) ने एक बड़ा हाथ मिलाया है।
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों कंपनियां मिलकर गुजरात में जमीन के नीचे ही लिग्नाइट से गैस बनाने के प्रोजेक्ट पर काम करेंगी। इसे ‘अंडरग्राउंड लिग्नाइट गैसीफिकेशन’ प्रोजेक्ट नाम दिया गया है। अगर यह प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भारत की विदेशी गैस पर निर्भरता काफी कम हो जाएगी।
इस बड़े प्रोजेक्ट के सफल होने से भारत को महंगे आयातित लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) पर अपनी निर्भरता कम करने में बहुत बड़ी मदद मिलेगी। पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से रिपोर्ट किया कि इस प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने के लिए तैयारियां काफी तेज हो चुकी हैं।
गुजरात के दो ब्लॉकों पर टिकी हैं नजरें
NLCIL और रिलायंस के बीच इस प्रोजेक्ट की तकनीकी क्षमता को जांचने के लिए समझौता हो चुका है और शुरुआती स्टडी चल रही है। इस प्रोजेक्ट के लिए गुजरात में स्थित NLCIL के दो लिग्नाइट ब्लॉकों को खास तौर पर चुना गया है, जहां जल्द काम शुरू होगा।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास गैसीफिकेशन टेक्नोलॉजी और गैस हैंडलिंग का पहले से ही बेहतरीन और लंबा अनुभव है। इसलिए उनकी इस खास तकनीकी विशेषज्ञता का पूरा फायदा उठाने के लिए सरकारी कंपनी ने उन्हें इस बेहद महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट में अपने साथ शामिल किया है।
जानिए जमीन के नीचे कैसे बनेगी गैस?
इस आधुनिक तकनीक के तहत जमीन के भीतर मौजूद लिग्नाइट को वहीं पर ‘सिंथेसिस गैस’ (Syngas) में बदला जाता है। यह मुख्य रूप से हाइड्रोजन और कार्बन मोनोऑक्साइड का मिश्रण होता है। इस गैस का इस्तेमाल उद्योगों में ईंधन या केमिकल और फर्टिलाइजर इंडस्ट्री में कच्चे माल के रूप में होगा।
NLCIL केवल गुजरात तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वह अपने संसाधनों के इस्तेमाल के लिए तेजी से विविधीकरण कर रही है। कंपनी तमिलनाडु के नेवेली में 4,394 करोड़ रुपये की भारी लागत से एक शानदार ‘लिग्नाइट-टू-मेथोनॉल’ प्लांट लगाने की बड़ी योजना पर काम कर रही है।
सरकार का ₹37,500 करोड़ का बूस्टर डोज
यह प्लांट अगले साल तक बनकर तैयार होने की उम्मीद है, जो पर्यावरण अनुकूल लक्ष्यों के बिल्कुल अनुरूप है। यह पार्टनरशिप ऐसे समय पर हुई है जब केंद्र सरकार ने इसी महीने कोयला और लिग्नाइट गैसीफिकेशन प्रोजेक्ट्स को बढ़ावा देने के लिए 37,500 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी है।
सरकार का लक्ष्य साल 2030 तक 100 मिलियन टन कोयले के गैसीफिकेशन का है। इस ऐतिहासिक कदम से भारत को एलएनजी, यूरिया, अमोनिया और मेथनॉल के भारी आयात से मुक्ति मिलेगी। अब रिलायंस के साथ मिलकर नवरत्न कंपनी देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बढ़ चुकी है।
Author: Rajesh Kumar

