Business News: दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों ने एक बार फिर सोने पर अपना भरोसा जताया है। फरवरी 2026 में इन बैंकों ने मिलकर करीब 19 टन सोना खरीदा। यह लगातार 23वां महीना है जब सोने की खरीदारी जारी रही। जनवरी में भी 6 टन सोना खरीदा गया था। इस साल के शुरुआती दो महीनों में ही कुल 25 टन सोना विभिन्न देशों के रिजर्व में जोड़ा जा चुका है।
पोलैंड ने सबसे अधिक सोना खरीदा, उज्बेकिस्तान दूसरे नंबर पर
फरवरी महीने में सोने का भंडार बढ़ाने की दौड़ में पोलैंड सबसे आगे रहा। पोलैंड के नेशनल बैंक ने अकेले 20 टन सोना खरीदा। इसके बाद उसका कुल गोल्ड रिजर्व 570 टन पहुंच गया है। अब पोलैंड के कुल विदेशी मुद्रा भंडार का 31 फीसदी हिस्सा सोने के रूप में है। दूसरे नंबर पर उज्बेकिस्तान रहा। वहां के सेंट्रल बैंक ने अपनी होल्डिंग में 8 टन का इजाफा किया। उज्बेकिस्तान का कुल रिजर्व अब 407 टन हो गया है, जो उसके कुल विदेशी मुद्रा भंडार का 88 फीसदी है।
तुर्की और रूस ने बेचा अपना सोना, क्या है वजह?
जहां कई देश सोना जमा कर रहे हैं, वहीं कुछ देशों ने अपनी जरूरतों के लिए इसे बेचा भी है। तुर्की ने फरवरी में अपने भंडार से 8 टन सोना घटाया। रिपोर्ट के अनुसार, मध्य-पूर्व में जारी तनाव और अपनी गिरती करेंसी को संभालने के लिए तुर्की ने यह कदम उठाया है। रूस ने भी अपने भंडार में 6 टन की कमी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस अपने खर्चों को पूरा करने के लिए सोना बेच रहा है। इसके बावजूद रूस दुनिया के टॉप पांच सोना रखने वाले देशों में बना हुआ है।
दुनिया के टॉप 8 गोल्ड किंग: अमेरिका पहले, भारत आठवें स्थान पर
वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा सोना रखने वाले देशों की सूची में अमेरिका सबसे ऊपर है। अमेरिका के पास 8,133 टन सोना है। जर्मनी 3,350 टन के साथ दूसरे, इटली 2,452 टन के साथ तीसरे और फ्रांस 2,437 टन के साथ चौथे स्थान पर है। रूस 2,330 टन के साथ पांचवें, चीन 2,299 टन के साथ छठे और स्विट्जरलैंड 1,040 टन के साथ सातवें स्थान पर है। भारत 880 टन सोने के साथ आठवें नंबर पर बना हुआ है। भारत का गोल्ड रिजर्व लगातार बढ़ रहा है।
लगातार 23 महीने से जारी है सोने की खरीदारी का सिलसिला
द कबीसी लेटर की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी का यह सिलसिला अब लगभग दो साल से चल रहा है। फरवरी 2026 में करीब 19 टन सोना खरीदा गया। यह आंकड़ा जनवरी की तुलना में काफी अधिक है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच केंद्रीय बैंक सोने को एक सुरक्षित निवेश मान रहे हैं। डॉलर पर बढ़ती निर्भरता से बचने के लिए भी कई देश सोने का भंडार बढ़ा रहे हैं। आने वाले महीनों में यह ट्रेंड जारी रहने की उम्मीद है।


