Science News: नासा के आर्टेमिस II मिशन ने इतिहास रच दिया है। चार अंतरिक्ष यात्रियों वाला यह मिशन शुक्रवार शाम को प्रशांत महासागर में स्प्लैशडाउन कर सुरक्षित पृथ्वी पर लौट आया। यह अपोलो 17 (1972) के बाद 53 वर्षों में मनुष्यों द्वारा चंद्रमा की पहली यात्रा थी। इस मिशन ने चंद्रमा के दूर वाले हिस्से को करीब से देखा और कई रिकॉर्ड तोड़ दिए।
लगभग 10 दिन की ऐतिहासिक यात्रा पूरी
ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार कमांडर रीड वाइजमैन, पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टिना कोच और जेरेमी हैंसन ने करीब 10 दिन की यात्रा पूरी की। यह दल सैन डिएगो तट से 40-60 मील दूर प्रशांत महासागर में उतरा। यूएस नेवी की रिकवरी टीम ने तुरंत उनकी मदद की। यात्रा के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों ने चंद्रमा की तस्वीरें लीं और वैज्ञानिक अवलोकन किए।
मानव इतिहास की सबसे दूर की यात्रा
इस मिशन में अंतरिक्ष यात्रियों ने लगभग 2,52,756 मील (4,06,771 किलोमीटर) की यात्रा की। यह मानव इतिहास की सबसे दूर की यात्रा है। इस दौरान उन्होंने एक पूर्ण सूर्यग्रहण का भी साक्षी बना। नासा के अनुसार, ओरियन स्पेसक्राफ्ट वायुमंडल में दोबारा प्रवेश करते समय 32 गुना ध्वनि की गति से आगे बढ़ा। उसने हजारों डिग्री तापमान झेला और फिर पैराशूट की मदद से धीरे-धीरे 17 मील प्रति घंटे की रफ्तार से पानी पर उतरा।
आर्टेमिस प्रोग्राम का अगला लक्ष्य मंगल
यह मिशन नासा के आर्टेमिस प्रोग्राम का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस प्रोग्राम का लक्ष्य चंद्रमा पर स्थायी मानव बेस स्थापित करना है। साथ ही अंततः मंगल ग्रह पर मानव मिशन भेजने की योजना है। अब नासा की नजर आर्टेमिस III पर है, जिसमें चंद्रमा की सतह पर उतरने की योजना बनाई गई है। इस सफल मिशन ने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में एक नया अध्याय जोड़ दिया है।


