बांग्लादेशी पेसर काजी ओनिक का दर्दनाक अंत: कंगाली और डोपिंग ने छीना क्रिकेट, 27 की उम्र में सन्यास लेकर दुनिया को रुलाया

Bangladesh News: बांग्लादेश क्रिकेट जगत से एक झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। कभी ‘भविष्य का सितारा’ कहे जाने वाले 27 वर्षीय तेज गेंदबाज काजी ओनिक ने अचानक क्रिकेट के सभी प्रारूपों से सन्यास ले लिया है। आर्थिक तंगी और लगातार मिल रही उपेक्षा से परेशान होकर ओनिक ने यह कड़ा कदम उठाया। बाएं हाथ के इस गेंदबाज ने अंडर-19 वर्ल्ड कप में अपनी रफ्तार से दुनिया को हैरान किया था। लेकिन आज उन्हें कड़वी सच्चाई के आगे हार माननी पड़ी है।

पृथ्वी शॉ को आउट कर चर्चा में आए थे ओनिक

काजी ओनिक ने साल 2018 के अंडर-19 वर्ल्ड कप के दौरान अपनी तेज गेंदबाजी से खूब सुर्खियां बटोरी थीं। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट के 6 मैचों में शानदार गेंदबाजी करते हुए 10 विकेट झटके थे। भारत के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मैच में उन्होंने पृथ्वी शॉ, रियान पराग और कमलेश नागरकोटी के विकेट लेकर सनसनी फैला दी थी। उनकी आक्रामक शैली और गति को देखकर खेल विशेषज्ञों ने उन्हें बांग्लादेश का अगला स्टार पेसर घोषित कर दिया था।

डोपिंग बैन ने करियर की कमर तोड़ दी

शानदार शुरुआत के बावजूद ओनिक का करियर विवादों की भेंट चढ़ गया। साल 2020 में नेशनल क्रिकेट लीग के दौरान वे डोपिंग टेस्ट में फेल पाए गए थे। इस गंभीर गलती की वजह से उन पर दो साल का कड़ा प्रतिबंध लगा दिया गया। युवा उम्र में लगे इस बैन ने उनके आत्मविश्वास और करियर की लय को बुरी तरह बिगाड़ दिया। सस्पेंशन खत्म होने के बाद उन्होंने वापसी की कोशिश की, लेकिन टीम में जगह बनाना मुश्किल हो गया।

आर्थिक बदहाली बनी सन्यास की बड़ी वजह

मैदान पर मौकों की कमी के साथ-साथ ओनिक को निजी जीवन में भारी आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा। लंबे समय तक प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर रहने के कारण उनकी जमा पूंजी खत्म हो गई थी। ओनिक ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए लिखा कि उन्होंने बहुत आगे जाने का सपना देखा था, लेकिन अब सपनों को हकीकत के आगे झुकना पड़ा है। उनके पास परिवार की जिम्मेदारियों के बीच अब क्रिकेट छोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं बचा।

बिना इंटरनेशनल डेब्यू किए मैदान को कहा अलविदा

काजी ओनिक को कभी बांग्लादेश की सीनियर नेशनल टीम की जर्सी पहनने का सौभाग्य नहीं मिल सका। हालांकि, घरेलू क्रिकेट में उनके आंकड़े काफी प्रभावशाली रहे हैं। उन्होंने 12 प्रथम श्रेणी मैचों में 31 विकेट और 50 लिस्ट-ए मुकाबलों में 66 विकेट अपने नाम किए। टी20 प्रारूप में भी उन्होंने 17 मैचों में 15 बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा। बांग्लादेश प्रीमियर लीग के 9 मैचों में भी उनके नाम 10 विकेट दर्ज हैं, जो उनकी प्रतिभा का प्रमाण है।

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