कुल्लू में चलती कार पर मौत बनकर गिरी चट्टान, खौफनाक मंजर देखकर कांप जाएगी रूह!

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में एक खौफनाक हादसा सामने आया है। मणिकर्ण-बरशैणी मार्ग पर घटीगढ़ के पास पहाड़ी दरकने से भारी भूस्खलन हुआ। यहां एक चलती कार पर अचानक विशाल चट्टान गिर गई। मलबे के नीचे दबकर कार पूरी तरह से चकनाचूर हो गई। राहत की बात यह रही कि चालक ने सही समय पर कूदकर अपनी जान बचा ली। थोड़ी सी देरी होने पर चालक की जान जा सकती थी। इस घटना से इलाके में दहशत है।

प्रशासन की लापरवाही से लोगों की जान पर भारी खतरा

घटीगढ़ क्षेत्र पिछले काफी समय से भूस्खलन के लिहाज से बहुत संवेदनशील बना हुआ है। मौसम साफ हो या बारिश का दिन, यहां पहाड़ी से पत्थर गिरते रहते हैं। सड़क से गुजरने वाले वाहन चालकों की जान हमेशा खतरे में रहती है। इस ताजा घटना ने प्रशासन की लचर कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है। ग्रामीणों ने कई बार अधिकारियों और नेताओं से इस समस्या का स्थायी समाधान मांगा था। इसके बावजूद प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

पहले भी हो चुके हैं हादसे, चक्का जाम करेंगे ग्रामीण

इस जगह पर सात अप्रैल को भी एक वाहन मलबे की चपेट में आ गया था। इसके बावजूद प्रशासन गहरी नींद में सोया रहा। विधायक सुंदर सिंह ठाकुर ने अधिकारियों के साथ इस क्षेत्र का दौरा किया था। उन्होंने यहां पुल बनाने की योजना तैयार की थी। काम शुरू होने से पहले ही यह नया हादसा हो गया। इससे गुस्साए मणिकर्ण घाटी के लोगों ने तीस अप्रैल को हाथिथान चौक पर चक्का जाम करने का सख्त ऐलान कर दिया है।

वैली ब्रिज की मांग को प्रशासन ने किया लगातार अनदेखा

स्थानीय ग्रामीणों और पंचायत प्रतिनिधियों ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है। उनका कहना है कि जल्द समाधान नहीं हुआ तो बड़ा हादसा हो सकता है। लोगों ने यहां वैली ब्रिज बनाने का सुझाव कई बार दिया है। प्रशासन ने लोगों की इस जायज मांग को हमेशा अनसुना किया है। लगातार हो रहे हादसों ने स्थानीय जनता का गुस्सा बहुत बढ़ा दिया है। लोग अब अपनी सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरने को पूरी तरह से मजबूर हो गए हैं।

पर्यटन पर पड़ रहा बुरा असर, रास्ते हो रहे लगातार बंद

घटीगढ़ क्षेत्र में साल दो हजार तेईस से भूस्खलन की घटनाएं लगातार हो रही हैं। साल दो हजार पच्चीस के नवंबर महीने में भी यहां बार-बार मलबा गिरा था। हालात इतने खराब हैं कि सप्ताह में दो से तीन बार यह रास्ता बंद हो जाता है। यह महत्वपूर्ण मार्ग तोष, पुलगा और खीरगंगा जैसे प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को जोड़ता है। भूस्खलन की इस भारी समस्या से स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटन कारोबार पर भी बहुत बुरा असर पड़ रहा है।

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