ईरान ने अमेरिका के सामने बातचीत के लिए रखी दो शर्तें, इस्लामाबाद पहुंचा उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल, बोला- ‘हमें भरोसा नहीं’

Pakistan News: अमेरिका के साथ युद्धविराम पर बातचीत के लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार देर रात इस्लामाबाद पहुंचा। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं। उनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी पाकिस्तान पहुंचे हैं। हालांकि ईरान ने साफ कर दिया है कि बातचीत तभी आगे बढ़ेगी जब अमेरिका उसकी पूर्व शर्तों को स्वीकार कर लेगा।

ईरान ने बातचीत के लिए ये दो शर्तें रखी हैं

इस्लामाबाद पहुंचने से पहले गालिबफ ने बातचीत शुरू करने के लिए अमेरिका के सामने दो शर्तें रखीं। पहली शर्त- लेबनान में तत्काल युद्धविराम लागू किया जाए। दूसरी शर्त- ईरान की जब्त की गई संपत्तियों को वापस किया जाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि ये दोनों मामले पहले से तय उपायों का हिस्सा हैं। बातचीत शुरू करने से पहले इन्हें पूरा करना अनिवार्य है।

‘हमें अमेरिका पर भरोसा नहीं, इतिहास ने बार-बार तोड़े वादे’

एयरपोर्ट पर गालिबफ ने साफ कहा कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल को उम्मीद तो है, लेकिन उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘हमारी नीयत अच्छी है, लेकिन हमें भरोसा नहीं है। अगर अमेरिका असली समझौते के लिए तैयार है, तो ईरान भी तैयार हो सकता है।’ उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकियों के साथ बातचीत का ईरान का अनुभव हमेशा नाकामी और वादों के उल्लंघन में खत्म हुआ है। यह बातचीत 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद अमेरिका और ईरान के बीच अब तक की सबसे उच्च स्तरीय बैठक है।

प्रतिनिधिमंडल में ये बड़े नेता शामिल

ईरानी मीडिया के अनुसार, गालिबफ के साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची, सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली अकबर अहमदीन, सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दुलनासेर हेम्मती और संसद के कुछ सदस्य भी इस्लामाबाद पहुंचे हैं। एयरपोर्ट पर पाकिस्तान के फील्ड मार्शल असीम मुनीर और विदेश मंत्री इशाक डार ने उनका स्वागत किया। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने उम्मीद जताई कि सभी पक्ष रचनात्मक रूप से बातचीत में शामिल होंगे।

तेहरान ने दो हफ्ते के युद्धविराम की शर्तें मान लीं

फार्स समाचार एजेंसी ने बताया कि तेहरान ने दो हफ्ते के सीजफायर की शर्तें मान ली हैं। हालांकि ईरान ने चेतावनी भी दी है कि अगर फिर से लड़ाई शुरू हुई तो एक बार फिर इलाके में अमेरिका के हितों और इजरायली शासन को खतरे में डाल दिया जाएगा। इससे पहले ईरान के सुप्रीम लीडर ने भी कहा था कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता, लेकिन होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपने अधिकार नहीं छोड़ेगा। अब सबकी निगाहें इस्लामाबाद में होने वाली इन ऐतिहासिक वार्ताओं पर टिकी हैं।

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