Washington News: अमेरिका में एक बहुत बड़े सरकारी स्वास्थ्य बीमा घोटाले का सनसनीखेज भंडाफोड़ हुआ है। इस महाघोटाले में 78 वर्षीय पाकिस्तानी-अमेरिकी व्यवसायी परवेज सिद्दीकी और उनके सात साथियों पर गंभीर आरोप लगे हैं। इन्होंने ब्रुकलिन में दो एडल्ट डे केयर सेंटर्स के जरिए करीब 325 करोड़ रुपये का फ्रॉड किया है।
संघीय अभियोजकों के अनुसार आरोपियों ने अपना एडल्ट डेकेयर और आशियाना सोशल एडल्ट डेकेयर नामक केंद्रों के माध्यम से मेडिकेड से फर्जी क्लेम सबमिट किए। उन्होंने कई बुजुर्गों का सिर्फ नाम के लिए नामांकन किया था। वे लाभार्थी इन डे केयर केंद्रों में कभी-कभार ही जाते थे।
‘लड्डू’ और ‘गिफ्ट्स’ के नाम पर ट्रांसफर किए करोड़ों डॉलर
इस पूरे घोटाले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि धोखाधड़ी की रकम को कानूनी नजरों से छिपाने के लिए आरोपियों ने कई शेल कंपनियों का सहारा लिया। उन्होंने बैंक पेमेंट्स ट्रांसफर करने के लिए ‘लड्डू’, ‘गिफ्ट्स’, ‘डिविडेंड’ और ‘मेडिसिन’ जैसे कोड शब्दों का इस्तेमाल किया।
दक्षिण एशिया की प्रसिद्ध मिठाई ‘लड्डू’ के नाम वाले इन फर्जी खातों में शातिरों ने लाखों डॉलर ट्रांसफर किए। इस हेरफेर के लिए फर्जी बिलिंग का एक बड़ा काम पाकिस्तान में बैठे स्टाफ द्वारा संभाला जा रहा था। इस तरह जांच एजेंसियों को लंबे समय तक गुमराह किया गया।
विदेश में रह रहे लोगों के नाम पर भी बनाए नकली रिकॉर्ड
जांचकर्ताओं का आरोप है कि इन केंद्रों ने मेडिकेड दावों को सही साबित करने के लिए फर्जी अटेंडेंस रिकॉर्ड और साइन-इन शीट तैयार कीं। कुछ रिकॉर्ड्स में तो दैनिक उपस्थिति की संख्या इन केंद्रों की कानूनी क्षमता की सीमा से भी बहुत ज्यादा दिखाई गई थी।
अभियोजकों ने अपनी जांच रिपोर्ट में दावा किया कि कई मेडिकेड लाभार्थी अमेरिका से बाहर रहते हुए भी लगातार वित्तीय दावे कर रहे थे। दस्तावेजों के अनुसार ऐसे कई लोग पाकिस्तान और मोरक्को जैसे देशों में आराम से रह रहे थे, जबकि उनका भारी-भरकम बिल न्यूयॉर्क से भेजा जा रहा था।
इस बड़े नेटवर्क को चलाने के लिए आरोपियों ने रिक्रूटर्स को भारी किकबैक यानी रिश्वत दी थी। इस रिश्वत के जरिए नए मेडिकेड लाभार्थियों को लालच देकर भर्ती किया जाता था। फिलहाल अमेरिकी जांच एजेंसियां इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह के सभी वित्तीय खातों को खंगालने में जुटी हैं।
Author: Pallavi Sharma


