Haryana News: सीबीआई द्वारा बैंक घोटाले में एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी को गिरफ्तार किए जाने के बाद हरियाणा के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। इस कार्रवाई के बाद जांच के दायरे में आए अन्य कई नौकरशाहों की धड़कनें तेज हो गई हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि सीबीआई जल्द ही कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां कर सकती है।
भ्रष्टाचार के इस बड़े मामले में केंद्रीय जांच एजेंसी की सख्ती को देखते हुए जांच का सामना कर रहे दो अन्य आईएएस अधिकारियों ने खुद सरकारी गवाह बनने का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, सीबीआई ने उनके इस प्रस्ताव में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई और जांच को आगे बढ़ाते हुए सीधे गिरफ्तारियां शुरू कर दी हैं।
पंचकूला नगर निगम में हुआ करोड़ों का खेल
गुरुवार को गिरफ्तार किए गए हरियाणा कैडर के आईएएस अधिकारी रामकुमार सिंह (आरके सिंह) पर शिकंजा लगातार कसता जा रहा है। सीबीआई ने गिरफ्तारी के तुरंत बाद उनके कई ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है। आरके सिंह पर पंचकूला नगर निगम के 79.46 करोड़ रुपये के फंड घोटाले का सीधा आरोप है।
केंद्रीय एजेंसी को पूछताछ और छापेमारी के दौरान आरोपी अधिकारी के खिलाफ कई अहम और पुख्ता सुराग हाथ लगे हैं। जांच में सामने आया है कि हरियाणा सरकार के 8 अलग-अलग विभागों के करीब 504 करोड़ रुपये फर्जी एफडी, डेबिट नोट और जाली दस्तावेजों के सहारे निकालकर शेल कंपनियों में ट्रांसफर किए गए थे।
दुबई भेजा गया पैसा, बेनामी संपत्तियों का खुलासा
जांच के दौरान यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आईएएस आरके सिंह ने कथित तौर पर करीब 2.5 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रकम दुबई में अपने बेटे के बैंक खाते में ट्रांसफर की थी। जब एजेंसी ने इस विदेशी लेन-देन के वैध स्रोत और दस्तावेजों की मांग की, तो वह कोई स्पष्ट ब्योरा नहीं दे सके।
इसके अलावा जांच टीम को करनाल में करीब 15 एकड़ कृषि भूमि और कई अन्य बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज भी मिले हैं। सीबीआई अब यह पता लगाने में जुटी है कि विदेश भेजी गई यह रकम वैध कमाई का हिस्सा थी या फिर सरकारी खजाने से लूटे गए घोटाले के धन को विदेश भेजा गया था।
अकाउंटेंट के कबूलनामे ने फंसाया
आईएएस आरके सिंह की इस गिरफ्तारी के पीछे जून के पहले सप्ताह में पकड़े गए सीनियर अकाउंटेंट सुरेंद्र जैन का बयान सबसे अहम कड़ा साबित हुआ। जेल में बंद अकाउंटेंट सुरेंद्र जैन ने पूछताछ में साफ कबूल किया था कि उसने फर्जी चेक और दस्तावेजों पर साइन तत्कालीन कमिश्नर के कहने पर ही किए थे।
अकाउंटेंट के इसी कबूलनामे और पुख्ता सबूतों के आधार पर सीबीआई ने इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस घोटाले के तार बैंकिंग सिस्टम की मिलीभगत और कई शेल कंपनियों से जुड़े होने के कारण प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपनी नजर बनाए हुए है।
Author: Sandeep Hooda


