Spiritual News: योग को अक्सर लोग केवल शारीरिक व्यायाम समझ लेते हैं। लेकिन यह सच नहीं है। आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर के अनुसार, योग शरीर, मन और ब्रह्मांड का अद्भुत मिलन है। यह एक संपूर्ण विज्ञान है जो इंसान के अंदर शांति और सकारात्मक ऊर्जा भरता है। मानसिक शांति के लिए इसे अपनाना जरूरी है।
लोग अक्सर आसन को ही पूरा योग मान लेते हैं। गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर इस धारणा को गलत बताते हैं। उनका कहना है कि आसन योग का एक छोटा सा हिस्सा है। योग मानव जीवन के समग्र विकास से जुड़ा है। यह हमारे व्यवहार और सोचने के तरीके में बहुत बड़ा बदलाव लाता है।
हर बच्चे में छिपा होता है एक महान योगी
जन्म के समय हर बच्चा एक योगी की तरह होता है। उसके अंदर योगी के सभी गुण मौजूद होते हैं। बच्चे के सांस लेने का तरीका और वर्तमान में जीने की कला अद्भुत होती है। योग हमें हमारे उसी मूल स्वभाव की ओर वापस ले जाता है। यह स्वभाव पूरी तरह से आनंद और प्रेम से भरा होता है।
जीवन में जब हर तरफ निराशा छा जाती है, तब योग नई उम्मीद जगाता है। योग के जरिए ही जीवन में उत्साह और नई ऊर्जा का संचार होता है। इससे हमारे भीतर की अंतर्ज्ञान क्षमता भी बढ़ती है। आध्यात्मिक गुरु के मुताबिक योग कर्मों में कुशलता लाने का दूसरा नाम है। यह हमें ऊर्जावान बनाए रखता है।
नकारात्मक भावनाओं से मुक्ति का अचूक मार्ग
तनाव और क्रोध आज के जीवन का हिस्सा बन चुके हैं। योग इन नकारात्मक भावनाओं से मुक्ति पाने की सबसे अच्छी तकनीक है। यह व्यक्ति को भीतर से प्रसन्न और दयालु बनाता है। इसके नियमित अभ्यास से लालच और चिंता जैसी बुराइयां दूर हो जाती हैं। आप अपने मन को आसानी से शांत और नियंत्रित कर सकते हैं।
श्री श्री रवि शंकर कहते हैं कि योग का असली मतलब एकात्मता है। यह लहर का अपनी गहराई से मिल जाने जैसा है। योग हमारे हृदय, मन और शरीर को पूरी तरह एक कर देता है। जब इंसान अपनी इंद्रियों को बाहरी दुनिया से हटाकर खुद से जोड़ता है, तब असली योग घटित होता है।
प्रसन्न रहना भी योग के अहम नियमों में से एक है। मुश्किल समय में भी चेहरे पर मुस्कान बनाए रखना योग का मुख्य उद्देश्य है। योग आपको अपनी भावनाओं का शिकार होने से बचाता है। यह आपको स्वतंत्रता की अनुभूति कराता है। योग व्यक्ति और समाज दोनों के लिए सुख व असीम आनंद के नए दरवाजे खोलता है।
Author: Pandit Balkrishan Sharma


