Thyroid and High Blood Pressure Connection: थायराइड से बिगड़ सकता है ब्लड प्रेशर का संतुलन, डॉक्टर से जानिए कंट्रोल करने के अचूक उपाय

Health News: थायराइड डिसऑर्डर और हाई ब्लड प्रेशर मौजूदा समय की दो ऐसी आम और गंभीर समस्याएं हैं, जो धीरे-धीरे शरीर के कई जरूरी अंगों को प्रभावित कर सकती हैं। अक्सर लोग इन्हें बिल्कुल अलग-अलग बीमारियों के रूप में देखते हैं, लेकिन वास्तव में ये दोनों समस्याएं आपस में बहुत गहराई से जुड़ी हुई हैं।

मानव शरीर में थायराइड ग्रंथि मेटाबॉलिज्म, हार्ट रेट और एनर्जी बैलेंस को कंट्रोल करने में मुख्य भूमिका निभाती है। जब यह ग्रंथि सही तरीके से काम नहीं करती, तो इसका सीधा असर हार्ट और ब्लड वेसल्स (रक्त वाहिकाओं) पर पड़ता है, जिससे शरीर का ब्लड प्रेशर पूरी तरह असंतुलित हो सकता है।

हैदराबाद के प्रसिद्ध यशोदा हॉस्पिटल के सीनियर डॉक्टर दिलीप गुडे से जानिए कि थायराइड के साथ हाई ब्लड प्रेशर को कैसे प्रभावी रूप से कंट्रोल करें। डॉक्टर के मुताबिक, जब शरीर में थायराइड हार्मोन का लेवल काफी ज्यादा होता है, तो हार्ट तेजी से धड़कने लगता है और ज्यादा मात्रा में ब्लड पंप करता है।

हार्ट द्वारा ज्यादा ब्लड पंप करने की इस स्थिति से मरीज का सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ सकता है। दूसरी ओर, हाइपोथायराइडिज्म की स्थिति में ब्लड वेसल्स काफी कठोर हो जाती हैं और उनका प्राकृतिक लचीलापन कम हो जाता है, जिससे ब्लड फ्लो में प्रतिरोध बढ़ता है और डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है।

सही समय पर इलाज और नियमित थायराइड फंक्शन टेस्ट है जरूरी

चिकित्सीय जांचों में देखा गया है कि जब थायराइड का सही मेडिकल इलाज शुरू हो जाता है, तो मरीजों के ब्लड प्रेशर में भी तेजी से सुधार आने लगता है। इसलिए थायराइड से पीड़ित मरीजों को अपनी निर्धारित दवाएं डॉक्टर के बताए अनुसार बिना नागा नियमित रूप से लेनी चाहिए।

इसके साथ ही डॉक्टरों द्वारा समय-समय पर थायराइड फंक्शन टेस्ट (TFT) कराना भी बेहद जरूरी बताया गया है, ताकि शरीर में हार्मोन के बदलते लेवल पर लगातार नजर रखी जा सके। दवाओं की सही खुराक और हार्मोन का संतुलन ही ब्लड प्रेशर को बढ़ने से रोकने की पहली सीढ़ी है।

तनाव मुक्त जीवनशैली और संतुलित खानपान से मिलेगा आराम

डॉ. दिलीप गुडे के अनुसार, थायराइड और हाई ब्लड प्रेशर दोनों को नियंत्रित रखने के लिए रोजमर्रा की लाइफस्टाइल में सकारात्मक सुधार करना बेहद जरूरी है। इसके लिए दैनिक आहार में नमक का सेवन कम करना, ताजे फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और कम फैट वाले प्रोटीन से भरपूर बैलेंस डाइट लेना बहुत फायदेमंद होता है।

मानसिक तनाव ब्लड प्रेशर बढ़ाने का एक सबसे प्रमुख कारण माना जाता है, इसलिए इसे कम करने के लिए नियमित ध्यान, योग और रोज 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है। स्मोकिंग और शराब का सेवन भी हार्ट हेल्थ को गंभीर नुकसान पहुंचाता है, इन्हें पूरी तरह छोड़ देना चाहिए।

हार्ट और किडनी हेल्थ की नियमित जांच को न करें नजरअंदाज

थायराइड के मरीजों को समय-समय पर अपने कोलेस्ट्रॉल लेवल, किडनी फंक्शन और हार्ट हेल्थ की जरूरी जांचें भी नियमित रूप से करानी चाहिए। डॉक्टरों के मुताबिक, ये दोनों समस्याएं एक साथ होने पर भविष्य में गंभीर हार्ट डिजीज (दिल की बीमारियों) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

यदि थायराइड का उचित इलाज पूरी तरह ठीक से होने के बाद भी मरीज का ब्लड प्रेशर कंट्रोल नहीं होता है, तो ऐसी स्थिति में डॉक्टरों द्वारा परामर्श के बाद एंटी-हाइपरटेंसिव यानी ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने वाली अलग दवाएं भी दी जा सकती हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

Author: Asha Thakur

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