Karnataka News: कर्नाटक सरकार बहुत जल्द मेडिकल क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए नए और कड़े दिशा-निर्देश जारी करने जा रही है। इसके तहत सभी छात्र-छात्राओं को यह सिखाया जाएगा कि पढ़ाई और शोध के लिए दान में मिलने वाले मृत शरीरों (शवों) के साथ कैसा व्यवहार करना है। उन्हें शवों का पूरा सम्मान करना सिखाया जाएगा।
सोशल मीडिया वीडियो के बाद जागा प्रशासन
यह महत्वपूर्ण कदम हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुए कुछ बेहद आपत्तिजनक वीडियो के बाद उठाया गया है। उन वीडियो में कुछ मेडिकल छात्र शवों के प्रति बेहद असंवेदनशील और अपमानजनक बातें करते नजर आ रहे थे। इस घटना के सामने आने के बाद पूरे देश में डॉक्टरों की नैतिकता पर सवाल उठने लगे थे।
इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए मेडिकल एथिक्स कमेटी अगले हफ्ते एक उच्च स्तरीय बैठक करने जा रही है। इस बैठक में मौजूदा नियमों को और अधिक मजबूत तथा सख्त बनाने पर विचार किया जाएगा। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में कोई भी छात्र शवों का अनादर न कर सके।
अंग और शरीर दान सबसे महान कार्य
राज्य के चिकित्सा शिक्षा मंत्री शरण प्रकाश पाटिल ने इस संबंध में एक बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अंग या पूरे शरीर का दान करना इस दुनिया के सबसे महान दानों में से एक है। उन्होंने साफ किया कि कर्नाटक में अभी तक ऐसा कोई अभद्र मामला आधिकारिक रूप से सामने नहीं आया है।
चिकित्सा शिक्षा मंत्री ने आगे बताया कि राज्य सरकार एहतियात के तौर पर पहले से ही सतर्क हो रही है। इसी वजह से मेडिकल कॉलेजों के छात्रों के लिए बेहद कड़े नियम बनाए जा रहे हैं। इन नए नियमों के आने के बाद छात्रों को अपनी मर्यादा और नैतिक सीमाओं में रहकर ही प्रैक्टिकल करने होंगे।
मेडिकल की पढ़ाई में क्यों जरूरी हैं शव?
डॉक्टरी की पढ़ाई के पहले साल में विद्यार्थियों को ‘एनाटॉमी’ यानी मानव शरीर की आंतरिक संरचना के बारे में विस्तार से सिखाया जाता है। इस विषय की पूरी पढ़ाई इन दान किए गए शवों के माध्यम से ही संभव हो पाती है। इसके बिना कोई भी छात्र कुशल डॉक्टर नहीं बन सकता है।
शवों के जरिए ही छात्र मानव शरीर के विभिन्न अंगों, नसों, मांसपेशियों और खून की धमनियों के आपसी जुड़ाव को गहराई से समझते हैं। इसी महत्वपूर्ण व्यावहारिक सीख के दम पर वे आगे चलकर सर्जरी, मेडिसिन और रेडियोलॉजी जैसे बड़े और जटिल क्षेत्रों के विशेषज्ञ डॉक्टर बनते हैं।
राज्य में नियम होंगे और भी ज्यादा कड़े
कर्नाटक मेडिकल काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक इस समय राज्य के कुल 72 मेडिकल कॉलेजों में लगभग 13,000 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं। इन सभी छात्र-छात्राओं को कॉलेज के पहले दिन से ही यह अनिवार्य रूप से सिखाया जाता है कि वे इन शवों का हर हाल में सम्मान करें।
शिक्षकों द्वारा छात्रों को यह लगातार समझाया जाता है कि शरीर दान करने वाले परिवारों ने समाज पर बहुत बड़ा उपकार किया है। नए सरकारी दिशा-निर्देश लागू होने के बाद इन नैतिक नियमों का पालन और भी ज्यादा सख्ती से कराया जाएगा। लापरवाही बरतने वाले छात्रों पर सख्त कार्रवाई भी की जा सकती है।
Suresh Gowda


