Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के 158 सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार बड़ी उलझन में फंस गई है। लिखित परीक्षा के बाद भी तैनाती की प्रक्रिया पूरी तरह अटक गई है। इस विवाद को सुलझाने के लिए सरकार ने अब एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है।
शिक्षकों के दो गुटों में टकराव से फंसा पेंच
दरअसल शिक्षा विभाग ने खाली पदों को भरने के लिए पहले एक सिलेक्शन टेस्ट का आयोजन किया था। इसके बाद काउंसलिंग के लिए नौ सेंटर बनाकर कमेटियां भी गठित की गईं। हालांकि पहले पंचायत चुनाव के कोड ऑफ कंडक्ट के कारण यह पूरी प्रक्रिया समय पर शुरू नहीं हो सकी।
अब शिक्षकों का एक धड़ा चाहता है कि वर्तमान स्टाफ को न बदला जाए। वहीं दूसरा धड़ा मेरिट के आधार पर ही पोस्टिंग की मांग कर रहा है। विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के लिए डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में 19 जून को पहली कैबिनेट सब-कमेटी मीटिंग बुलाई गई है।
डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने इस संवेदनशील मुद्दे पर एजुकेशन मिनिस्टर रोहित ठाकुर के साथ सेक्रेटेरिएट में विस्तृत चर्चा की है। उन्होंने अफसरों को बैठक के लिए पूरा ड्राफ्ट तैयार रखने के निर्देश दिए हैं। इस बैठक में दोनों पक्षों के दावों की गहन समीक्षा की जाएगी।
कोर्ट के फैसले के बाद भी ट्रांसफर का बड़ा डर
बड़ा सवाल यह है कि जब विभाग ने लिखित परीक्षा आयोजित कर ली थी, तो अब अड़चन क्यों आ रही है। विरोध करने वाले कुछ शिक्षक पहले हाईकोर्ट भी गए थे। हालांकि माननीय कोर्ट ने तब शिक्षा विभाग की इस चयन परीक्षा के फैसले को बिल्कुल सही ठहराया था।
अब सीबीएसई सब-कैडर टीचर वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष खजान सिंह ने वर्चुअल मीटिंग कर मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांगा है। दूसरी तरफ राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने सुझाव दिया है कि इस साल पुराने पैटर्न पर ही स्टाफ को काम करने दिया जाए।
शिक्षा विभाग का तर्क है कि बीच सत्र में यदि 10 से 12 हजार शिक्षकों का ट्रांसफर किया गया, तो बच्चों की पढ़ाई पर इसका बहुत बुरा असर पड़ेगा। सरकार ने पहले ही मिड-सेशन में सभी प्रकार के जनहित तबादलों पर पूरी तरह बैन लगाया हुआ है।
सैकड़ों छात्र छोड़ चुके हैं सरकारी सीबीएसई स्कूल
इस प्रशासनिक देरी और अनिश्चितता के कारण करीब 438 विद्यार्थियों ने इन स्कूलों को छोड़कर दूसरे बोर्ड में अपना माइग्रेशन करवा लिया है। हालांकि सीबीएसई संबद्धता मिलने के बाद सरकारी स्कूलों में कुल 4,243 नए छात्र-छात्राओं का रिकॉर्ड एडमिशन भी दर्ज हुआ है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार शैक्षणिक सत्र 2026-27 में छात्रों की कुल संख्या बढ़कर 82,717 तक पहुंच गई है, जो पिछले साल मात्र 78,474 थी। अब 19 जून को होने वाली मंत्रियों की बैठक पर ही इन स्कूलों का भविष्य और नया शेड्यूल निर्भर करेगा।
Reported By: Sunita Gupta


