Shimla News: देश की सर्वोच्च अदालत ने हिमाचल प्रदेश की सियासत और स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को हिमाचल प्रदेश के विधायकों को नगर निकायों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के आगामी चुनाव में मतदान करने की बड़ी अनुमति प्रदान कर दी है।
शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के चार जून के उस पुराने अंतरिम आदेश पर पूरी तरह रोक लगा दी है, जिसमें पदेन सदस्य होने के बावजूद विधायकों को इन स्थानीय चुनावों में वोट देने से पूरी तरह रोक दिया गया था।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस वी. मोहना की पीठ कांग्रेस के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार और अन्य लोगों द्वारा दायर विशेष याचिकाओं पर गहन सुनवाई कर रही थी। इन याचिकाओं में हाई कोर्ट के उस फैसले को कड़ी चुनौती दी गई थी, जिससे विधायकों के अधिकारों पर रोक लगी थी।
माननीय सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने विधायकों को मतदान करने की अनुमति देते हुए एक जरूरी शर्त भी साफ की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ऐसे सभी स्थानीय पदाधिकारियों के चुनाव का जो भी अंतिम नतीजा आएगा, वह हाई कोर्ट के अंतिम फैसले के पूरी तरह अधीन होगा।
हाई कोर्ट जाने वाले 11 विरोधियों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
शीर्ष अदालत ने हालांकि उन 11 लोगों को आधिकारिक नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, जिन्होंने सबसे पहले हाई कोर्ट का रुख किया था। इन लोगों ने नगर पालिकाओं के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के चुनाव में विधायकों को मतदान की अनुमति देने वाले सरकारी कदम का कड़ा विरोध किया था।
इस बड़े कानूनी विवाद के कारण राज्य की स्थानीय राजनीति में काफी समय से उथल-पुथल मची हुई थी। अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाने से राज्य सरकार और सत्ता पक्ष के विधायकों ने बड़ी राहत की सांस ली है। इस बेहद संवेदनशील मामले की अगली सुनवाई अब 17 अगस्त को होगी।
Author: Sunita Gupta


