World News: अमेरिका और ईरान के बीच हुए ऐतिहासिक शांति समझौते पर इजरायल ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने सोमवार को दो टूक कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता वाला यह समझौता इजरायल पर बिल्कुल भी लागू नहीं होगा। इजरायल अपनी सुरक्षा के फैसले खुद करेगा।
इजरायली मंत्री ने कहा, हम अमेरिका के गुलाम नहीं हैं
इजरायली मंत्री का यह बड़ा बयान तब आया जब दोनों देशों में होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने पर सहमति बनी है। इसके साथ ही युद्ध में एक अस्थायी संघर्षविराम को बढ़ाने की भी शुरुआती डील हुई है। इस बीच, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इजरायली मंत्री ने साफ लिखा कि ट्रंप का यह समझौता हमें कतई नहीं बांध सकता।
मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने कड़े शब्दों में कहा कि इजरायल संयुक्त राज्य अमेरिका के अधीन कोई कमजोर देश नहीं है। हम एक पूरी तरह स्वतंत्र और संप्रभु देश हैं। हम अमेरिका से बहुत प्यार करते हैं। हम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आभारी भी हैं, लेकिन अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के हितों को अंतरराष्ट्रीय समझौतों के भरोसे नहीं छोड़ सकते।
विदेशी दबाव मानने पर हमेशा चुकानी पड़ी है भारी कीमत
इजरायली मंत्री ने इतिहास का हवाला देकर अपने इस तीखे विरोध को सही ठहराया। उन्होंने पुरानी गलतियों को याद करते हुए कहा कि जब भी इजरायल ने विदेशी दबाव के आगे घुटने टेके, उसे भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने ओस्लो समझौते, लेबनान समझौते और गाजा का उदाहरण देकर कहा कि हमने हमेशा इसकी कीमत अपने खून से चुकाई है।
सुरक्षा मंत्री बेन-ग्विर का मानना है कि हिजबुल्लाह और अन्य ईरान समर्थित आतंकी संगठनों से निपटने के लिए सेना को पूरी छूट मिलनी चाहिए। वह ऐसे किसी भी समझौते के सख्त खिलाफ हैं जो इजरायली सेना के हाथ बांधता हो। उन्होंने कहा कि हम ऐसे किसी समझौते के हिस्सेदार नहीं बन सकते जो हमारी सुरक्षा न करे।
लेबनान पर सख्त रुख और हिजबुल्लाह के खात्मे की मांग
उन्होंने मांग की कि इजरायल को हिजबुल्लाह के पूरी तरह खात्मे से कम किसी भी बात पर राजी नहीं होना चाहिए। जंग के दौरान कब्जा की गई जमीन से सेना को पीछे नहीं हटना चाहिए। उन्होंने उत्तरी कस्बों की सुरक्षा का हवाला देते हुए लेबनान को चेतावनी दी कि हर मिसाइल का जवाब बेरूत पर हमले से दिया जाएगा।
इस बीच स्विट्जरलैंड में आगामी शुक्रवार, 19 जून को इस शांति समझौते पर औपचारिक रूप से दस्तखत होने की उम्मीद है। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने भी डील की पुष्टि की है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि अंतिम दस्तखत होने तक इसे लागू नहीं माना जाएगा।
Author: Pallavi Sharma


