विलुप्त होने की कगार पर खड़े ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ के लिए आई खुशखबरी, जैसलमेर के ब्रीडिंग सेंटर में गूंजी तीन नई किलकारियां

Weather News: भारत के सबसे संकटग्रस्त पक्षी ‘ग्रेट इंडियन बस्टर्ड’ के संरक्षण को लेकर एक बहुत ही सुखद और बड़ी खबर सामने आई है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने रविवार को इस संबंध में बेहद महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण के लिए चल रहे विशेष कैप्टिव ब्रीडिंग प्रोग्राम के तहत तीन नए चूजों का जन्म हुआ है। इसके साथ ही इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के चौथे वर्ष में अब तक पैदा हुए चूजों की कुल संख्या बढ़कर छब्बीस हो गई है।

क्या होती है कैप्टिव ब्रीडिंग संरक्षण रणनीति?

कैप्टिव ब्रीडिंग असल में एक बेहद आधुनिक और वैज्ञानिक संरक्षण रणनीति है। इसके तहत दुनिया से विलुप्त होने की कगार पर खड़ी या अत्यधिक संकटग्रस्त प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर निकाला जाता है। फिर उन्हें चिड़ियाघरों या विशेष संरक्षण केंद्रों के नियंत्रित वातावरण में सुरक्षित रखकर प्रजनन कराया जाता है।

केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर इस बड़ी सफलता की जानकारी साझा की। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि इस नए मौसम में तीन नए चूजे पैदा हुए हैं। इनमें से एक चूजा जंगली अंडे से और दो चूजे कैप्टिव अंडों से सुरक्षित बाहर निकले हैं।

कृत्रिम गर्भाधान से मिली सबसे बड़ी सफलता

रिकॉर्ड के अनुसार, जीआईबी की कैप्टिव ब्रीडिंग के चौथे साल में अब तक कुल 26 चूजे सुरक्षित रूप से बाहर आ चुके हैं। वैज्ञानिकों के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इनमें से 18 चूजे कृत्रिम गर्भाधान के जरिये, चार प्राकृतिक प्रजनन से और चार जंगल से इकट्ठा किए गए अंडों से निकले हैं।

इन जंगली अंडों के बदले राजस्थान में एक विशेष ‘जंपस्टार्ट इंटरवेंशन’ तकनीक का प्रयोग किया गया है। इसके जरिये तीन अन्य चूजे पूरी तरह प्राकृतिक माहौल में सुरक्षित रूप से निकले हैं। वैज्ञानिकों के इस बड़े और अनोखे प्रयास का मुख्य मकसद पक्षियों की शुरुआती जेनेटिक विविधता को पहले से कहीं बेहतर बनाना है।

Author: Shilla Bhatia

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