Health News: हर साल दुनिया भर में 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस मनाया जाता है। इस विशेष दिन को मनाने का सबसे बड़ा मकसद लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक करना है। इसके साथ ही यह दिन उन स्वैच्छिक रक्तदाताओं को आभार जताने का भी अवसर देता है जो निस्वार्थ भाव से लोगों की जान बचाते हैं।
इस खास दिन को मनाने के लिए 14 जून की तारीख को ही क्यों चुना गया, इसके पीछे एक बहुत ही महत्वपूर्ण ऐतिहासिक कारण है। दरअसल इसी दिन मशहूर ऑस्ट्रियाई जीवविज्ञानी और चिकित्सक कार्ल लैंडस्टीनर का जन्म हुआ था। उन्होंने ही चिकित्सा विज्ञान की सबसे बड़ी खोजों में से एक को अंजाम दिया था।
कौन थे वैज्ञानिक कार्ल लैंडस्टीनर?
डॉ. कार्ल लैंडस्टीनर ने साल 1900 में मानव रक्त के मुख्य समूहों यानी ABO ब्लड ग्रुप सिस्टम की खोज की थी। उन्होंने बताया कि इंसानों का खून अलग-अलग ग्रुप जैसे A, B, AB और O में बंटा होता है। इस क्रांतिकारी खोज के लिए उन्हें साल 1930 में प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।
कार्ल लैंडस्टीनर की इस महत्वपूर्ण खोज की वजह से ही आज चिकित्सा जगत में सुरक्षित ब्लड ट्रांसफ्यूजन संभव हो सका है। एक व्यक्ति का खून दूसरे व्यक्ति को बिना किसी खतरे के चढ़ाया जा सकता है। उनके इसी महान योगदान को सर्वोच्च सम्मान देने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने उनके जन्मदिन को चुना।
विश्व रक्तदान दिवस का मुख्य उद्देश्य
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साल 2004 में पहली बार इस दिन को मनाने की शुरुआत की थी। इसे मनाने का पहला बड़ा उद्देश्य उन लोगों की सराहना करना है जो बिना किसी स्वार्थ के रक्तदान करते हैं। इसके अलावा अस्पतालों में सुरक्षित रक्त, प्लाज्मा और प्लेटलेट्स की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता बढ़ाना है।
यह दिन युवाओं को नियमित रूप से रक्तदान करने के लिए प्रेरित करता है ताकि आपातकालीन स्थितियों में खून की कमी से किसी की जान न जाए। अक्सर लोग सोचते हैं कि रक्तदान से शरीर कमजोर होता है। जबकि सच यह है कि दान किया गया खून शरीर में महज 24 से 48 घंटों में दोबारा बन जाता है।
Asha Thakur


