Spiritual News: आज ज्येष्ठ अधिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि है। इस पावन अवसर पर देश भर में कालाष्टमी का व्रत पूरी श्रद्धा के साथ रखा जा रहा है। यह विशेष व्रत भगवान शिव के सबसे उग्र रूप माने जाने वाले भगवान काल भैरव को समर्पित होता है। इस दिन भक्त उनकी विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालाष्टमी पर व्रत और सच्ची श्रद्धा से पूजा करने पर भगवान काल भैरव अति प्रसन्न होते हैं। वे अपने भक्तों को जीवन के सभी संकटों से तुरंत मुक्ति दिलाते हैं। साथ ही हर तरह के नकारात्मक प्रभावों और शत्रुओं से भी भक्तों की रक्षा करते हैं।
तीन साल बाद आया पूजा का यह विशेष मौका
ईश्वरीय कृपा मिलने से व्यक्ति के जीवन में हमेशा सुख, शांति और समृद्धि आती है। आज अधिक मास की कालाष्टमी का व्रत बेहद फलदायी माना जा रहा है। चूंकि यह खास व्रत हर तीन साल में केवल एक बार आता है, इसलिए सनातन धर्म में इसका बहुत ही विशेष महत्व बताया गया है।
कालाष्टमी के पावन दिन प्रदोष काल में भगवान काल भैरव की आराधना की जाती है। प्रदोष काल का अर्थ सूर्यास्त के आसपास का समय होता है। पंचांग के अनुसार आज प्रदोष काल शाम 6:30 बजे से शुरू होकर शाम 7:30 बजे तक रहेगा। भक्तों को पूजा के लिए एक घंटे का शुभ समय मिलेगा।
इस आसान विधि से करें बाबा भैरव को प्रसन्न
कालाष्टमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत रखने का संकल्प लें। फिर शाम को प्रदोष काल के दौरान पूरे विधि-विधान से भगवान काल भैरव की पूजा शुरू करें। पूजा के स्थान पर भगवान की मूर्ति या सुंदर तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद भगवान को ताजे फूल और तिलक लगाएं।
भगवान काल भैरव को सरसों का तेल, काले तिल, नारियल, लड्डू और मीठा पान जरूर अर्पित करें। आप इमरती, जलेबी, काले चने, दही-वड़ा, हलवा या खीर का भोग लगा सकते हैं। इसके बाद सरसों के तेल का दीपक जलाकर भैरव चालीसा का पाठ करें और उनके मंत्रों का जाप करें।
जीवन से खत्म होगा हर तरह का डर और दुख
यह व्रत भगवान काल भैरव का दिव्य आशीर्वाद पाने का एक बहुत ही उत्तम अवसर है। इस दिन सच्चे मन से पूजा करने से गंभीर बीमारियों, दुखों और हर तरह के अज्ञात डर से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाती है। शास्त्रों के अनुसार काल भैरव न्याय और रक्षा के देवता हैं।
भगवान भैरव की नियमित पूजा करने से इंसानी जीवन में अनुशासन आता है और आत्मबल बढ़ता है। इस विशेष दिन अपनी क्षमता के अनुसार किए गए दान-पुण्य के कार्यों का भी कई गुना शुभ फल प्राप्त होता है। यह व्रत जीवन में खुशहाली का मार्ग पूरी तरह प्रशस्त करता है।
Author: Pandit Balkrishan Sharma


