मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना: क्या बिना ब्याज के 5 लाख रुपये का सपना सिर्फ कागजों तक सीमित है? जानिए जमीनी हकीकत

Uttar Pradesh News: मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास योजना के तहत बिना गारंटी और बिना ब्याज के पांच लाख रुपये तक का लोन देने का वादा उत्तर प्रदेश सरकार ने किया था। इस महत्वाकांक्षी योजना के जरिए राज्य के सैकड़ों युवा अपने स्वरोजगार का सपना संजो रहे हैं। लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है और पात्र युवा महीनों से आवेदन स्वीकृत होने का इंतजार कर रहे हैं। बैंकों में लंबित पड़ी फाइलों के कारण युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है और शासन के तय लक्ष्य भी प्रभावित हो रहे हैं।

योजना की सुस्त रफ्तार से युवाओं का टूट रहा भरोसा

उत्तर प्रदेश दिवस के अवसर पर 24 जनवरी 2025 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विशेष योजना की शुरुआत की थी। योजना का मुख्य उद्देश्य 18 से 40 वर्ष के युवाओं को उद्योग, सेवा या व्यापार क्षेत्र में नई इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसके तहत पांच लाख रुपये तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन बैंकिंग स्तर पर बढ़ती लापरवाही ने युवाओं की चिंता बढ़ा दी है। स्वर्ण जयंती नगर के निवासी राम खिलाड़ी ने तीन महीने पहले भारतीय स्टेट बैंक में आवेदन किया था, लेकिन बार-बार चक्कर काटने के बाद भी उनकी फाइल आगे नहीं बढ़ी।

बैंकों में लंबित आवेदनों की संख्या और प्रशासनिक नाराजगी

जिले के विभिन्न बैंकों में इस समय 200 से अधिक आवेदन मंजूरी के लिए लंबित पड़े हैं। पिछले दिनों जिलाधिकारी अविनाश कुमार की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में इस गंभीर मुद्दे को प्रमुखता से उठाया गया था। डीएम ने इस सुस्त प्रक्रिया पर कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केंद्र को कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद उपायुक्त उद्योग ने सभी क्षेत्रीय प्रबंधकों और जिला समन्वयकों को पत्र भेजकर लंबित मामलों का तुरंत निस्तारण करने और युवाओं को राहत देने के सख्त आदेश जारी किए हैं।

एसबीआई और पीएनबी में सबसे ज्यादा फाइलें अटकीं

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) में सबसे अधिक 45 आवेदन लंबित पाए गए हैं। इसके ठीक बाद पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 44 आवेदन अटके हुए हैं। अन्य प्रमुख बैंकों की बात करें तो केनरा बैंक में 20, एक्सिस बैंक में 15, बैंक ऑफ बड़ौदा में 14 और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया में 9 आवेदन फंसे हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में 9, आईसीआईसीआई बैंक में 8, एचडीएफसी बैंक में 2 और बैंक ऑफ इंडिया में 1 आवेदन अभी भी अपनी अंतिम स्वीकृति का इंतजार कर रहा है।

छह महीने से ठप है कारोबार और अधूरे रह गए सपने

क्वारcontentर्सी क्षेत्र के अरुण कुमार ने खाद्य उत्पादों का नया कारोबार शुरू करने के लिए लगभग छह महीने पहले आवेदन किया था। उनका आवेदन बैंक ऑफ बड़ौदा में लंबित है और अंतिम स्वीकृति न मिलने से उनका काम शुरू नहीं हो सका है। इसी तरह गंगीरी कस्बे की प्रमिला वार्ष्णेय ने फरवरी में ब्यूटी पार्लर खोलने के लिए केनरा बैंक में आवेदन किया था। बैंक प्रबंधन कभी शाखा प्रबंधक की अनुपस्थिति तो कभी फील्ड ऑफिसर के बाहर होने का बहाना बनाता रहा। अब बैंक ने उनके पति के पुराने लोन डिफॉल्ट का हवाला देकर फाइल रोक दी है।

लक्ष्य हासिल करने में एमएसएमई विभाग के सामने बड़ी चुनौती

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग द्वारा संचालित इस योजना का मुख्य लक्ष्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। लेकिन बैंकों की इस लचर कार्यप्रणाली के कारण योजना की गति पूरी तरह धीमी हो गई है। प्रशासनिक अधिकारी अब बैंक प्रबंधन के साथ लगातार विशेष बैठकें कर रहे हैं ताकि इन मामलों को जल्द से जल्द सुलझाया जा सके। जिन बैंक शाखाओं में लंबित आवेदनों की संख्या सबसे ज्यादा है, उनसे लिखित में स्पष्टीकरण मांगा गया है। विभाग का प्रयास है कि प्राथमिकताओं के आधार पर सभी पात्र आवेदकों को ऋण वितरित किया जाए।

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