Shimla News: हिमाचल प्रदेश में मई महीने के दौरान मौसम के मिजाज ने लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत जरूर दी है। प्रदेश के छह प्रमुख जिलों में इस बार सामान्य से काफी अधिक वर्षा दर्ज की गई है, जिससे तापमान में गिरावट आने के साथ-साथ स्थानीय जल स्रोतों और कृषि क्षेत्रों को बड़ा फायदा पहुंचा है।
हालांकि, इस दौरान राज्य के कई हिस्सों में असमय चली तेज आंधी और भारी ओलावृष्टि के कारण सेब के बागानों सहित अन्य नगदी फसलों को भारी नुकसान भी उठाना पड़ा है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के ताजा पूर्वानुमान के मुताबिक, राज्य में पश्चिमी विक्षोभ का असर आगामी 5 जून तक लगातार बने रहने की पूरी संभावना है।
इस सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से हिमाचल प्रदेश के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर ताजा हिमपात यानी बर्फबारी होने का अनुमान जताया गया है। इसके साथ ही राज्य के मध्य और निचले इलाकों में गरज-चमक के साथ तेज वर्षा होने की चेतावनी भी जारी की गई है।
ऊना में सामान्य से 125% ज्यादा बरसे बादल
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मई माह में पूरे हिमाचल प्रदेश में औसतन 52.2 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जो कि सामान्य वर्षा (63.3 मिलीमीटर) के मुकाबले करीब 18 प्रतिशत कम है। लेकिन जिलावार आंकड़ों को देखें तो ऊना जिले में इस बार रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है।
ऊना में सामान्य वर्षा 32.4 मिलीमीटर के मुकाबले इस बार 125 प्रतिशत अधिक यानी कुल 72.9 मिलीमीटर वर्षा हुई है। इसके अलावा बिलासपुर में 58 फीसदी, हमीरपुर में 33 फीसदी, कांगड़ा में 26 फीसदी, मंडी में 13 फीसदी, जबकि शिमला और सिरमौर जिलों में सामान्य से 47-47 प्रतिशत अधिक बारिश हुई है।
ऊंची चोटियों पर बर्फबारी और तापमान में भारी अंतर
रविवार को हिमाचल प्रदेश की सबसे ऊंची चोटियों बारालाचा, कुंजुम और रोहतांग पास में हल्की बर्फबारी दर्ज की गई, जिससे वादियों में अचानक ठंडक बढ़ गई है। बीते चौबीस घंटों के दौरान सबसे अधिक वर्षा श्री नैना देवी जी में 46.4 और सराहन में 29 मिलीमीटर मापी गई है।
मौसम के इस उतार-चढ़ाव के कारण राज्य के अलग-अलग शहरों के दिन के तापमान में दो से लेकर नौ डिग्री सेल्सियस तक का बड़ा अंतर देखने को मिला है। जहां एक तरफ कल्पा और मनाली के अधिकतम तापमान में गिरावट आई है, वहीं मंडी और सुंदरनगर में धूप खिलने से पारा तेजी से चढ़ा है।
Author: Shilla Bhatia


