सराज में रिश्तों पर भारी पड़ी चुनावी जंग, सास ने बहू को हराया तो ननद ने भाभी को दी मात

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सराज क्षेत्र में पंचायत चुनावों ने इस बार अलग ही तस्वीर पेश की। केओली पंचायत में कई वार्डों में सगे रिश्तेदार एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरे। कहीं सास और बहू आमने-सामने थीं तो कहीं ननद और भाभी के बीच सीधा मुकाबला हुआ। चुनाव परिणाम आने के बाद यह अनोखी जंग पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गई।

पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के गृह विधानसभा क्षेत्र सराज में पंचायत चुनावों के दूसरे चरण के नतीजों ने लोगों का ध्यान खींचा। मतदान के बाद जब मतगणना शुरू हुई तो सबसे अधिक नजर उन वार्डों पर रही, जहां चुनावी मुकाबला परिवार के सदस्यों के बीच था। कई सीटों पर बेहद कांटे की टक्कर देखने को मिली।

वार्ड नंबर दो में ननद की बड़ी जीत

केओली पंचायत के वार्ड नंबर 2, केओली-1 में ननद और भाभी के बीच मुकाबला पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना रहा। यहां वीना देवी और उनकी सगी भाभी खीरामणी चुनाव मैदान में थीं। मतगणना के बाद वीना देवी ने 58 वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर वार्ड सदस्य का चुनाव अपने नाम कर लिया।

इस परिणाम के बाद गांव में दिनभर इसी मुकाबले की चर्चा होती रही। स्थानीय लोगों का कहना था कि पंचायत चुनावों में पहली बार परिवार के इतने करीबी सदस्य आमने-सामने दिखाई दिए। चुनावी माहौल ने रिश्तों को भी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का हिस्सा बना दिया।

सास और बहू के बीच भी मुकाबला

वार्ड नंबर 4, केओली-3 में सास और बहू के बीच सीधी टक्कर देखने को मिली। यहां रीना ठाकुर और उनकी बहू लता चुनाव मैदान में थीं। बेहद रोमांचक मुकाबले में रीना ठाकुर ने केवल चार वोटों के अंतर से जीत हासिल की। यह परिणाम पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया।

वहीं वार्ड नंबर 5, केओली-4 में भी सास और बहू आमने-सामने थीं। यहां सवित्रा देवी ने अपनी बहू वनिता ठाकुर को 23 मतों से पराजित किया। दोनों वार्डों के नतीजों ने यह दिखाया कि पंचायत चुनावों में इस बार पारिवारिक रिश्तों से ज्यादा मतदाताओं की पसंद ने भूमिका निभाई।

मतगणना के बाद बनी चर्चा का केंद्र

मतगणना पूरी होने के बाद कई गांवों में जीत का जश्न मनाया गया, जबकि कुछ परिवारों में चुनावी मुकाबले के कारण खामोशी भी देखने को मिली। समर्थकों ने अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत का स्वागत किया और पंचायत स्तर पर विकास कार्यों को लेकर उम्मीदें जताईं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सराज के इन चुनाव परिणामों ने ग्रामीण राजनीति की बदलती तस्वीर सामने रखी है। पंचायत स्तर की राजनीति अब पहले से अधिक प्रतिस्पर्धी हो चुकी है। इस बार के चुनावों ने यह संदेश दिया कि गांव की सत्ता के लिए रिश्तेदार भी एक-दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरने से पीछे नहीं हट रहे हैं।

Author: Sunita Gupta

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