Religious News: हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि को बेहद पवित्र और मंगलकारी माना गया है। जब यह तिथि पुरुषोत्तम मास यानी अधिकमास में पड़ती है, तो इसका आध्यात्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस बार मई महीने के आखिरी दिनों में यह दुर्लभ और पवित्र संयोग बनने जा रहा है।
आमतौर पर एक साल में 12 महीने होते हैं। सौर और चंद्र मास के अंतर को पाटने के लिए हर तीसरे साल एक अतिरिक्त महीना जुड़ता है। इसी को अधिकमास या पुरुषोत्तम मास कहते हैं। इस अतिरिक्त महीने में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष विधान शास्त्रों में बताया गया है।
तारीख को लेकर क्यों बना हुआ है भक्तों में भारी भ्रम?
इस साल अधिकमास पूर्णिमा की सही तारीख को लेकर लोग असमंजस में हैं। श्रद्धालु समझ नहीं पा रहे हैं कि व्रत, स्नान और दान 30 मई को करना सही रहेगा या फिर 31 मई को। पंचांग के अनुसार गणना करने पर इस बार तिथियों का एक विशेष संयोग दिखाई दे रहा है।
पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 30 मई को सुबह 11 बजकर 58 मिनट से हो रही है। इसका समापन अगले दिन 31 मई को दोपहर 3 बजकर 15 मिनट पर होगा। हिंदू धर्म में उदयातिथि का विशेष महत्व होता है। उदयातिथि के कारण भ्रम की स्थिति पूरी तरह साफ हो जाती है।
जानिए किस दिन रखा जाएगा व्रत और कब होगा स्नान-दान
शास्त्रों के अनुसार सूर्योदय के समय रहने वाली तिथि को ही पूरे दिन के लिए मान्य माना जाता है। इस नियम के आधार पर रविवार, 31 मई 2026 को अधिकमास पूर्णिमा का व्रत रखा जाएगा। इसी दिन पवित्र नदियों में आस्था की डुबकी लगाना और दान करना सर्वश्रेष्ठ फलदायी होगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस विशेष तिथि पर स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। पूजा के बाद भूखे और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराना उत्तम माना गया है। इस दिन अन्न, वस्त्र और शीतल जल का दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है।
नोट कर लें स्नान और भगवान विष्णु की पूजा के शुभ मुहूर्त
पवित्र नदियों में स्नान के लिए सबसे उत्तम ब्रह्म मुहूर्त माना जाता है। 31 मई को ब्रह्म मुहूर्त सुबह 04:08 से 04:56 तक रहेगा। इसके अलावा अमृत काल सुबह 04:33 से 06:20 तक और अभिजीत मुहूर्त दोपहर 11:57 से 12:51 तक रहेगा।
स्नान के बाद श्रीहरि विष्णु और माता लक्ष्मी के पूजन के लिए भी विशेष समय निर्धारित है। पूजा के लिए सुबह 7 बजकर 8 मिनट से दोपहर 12 बजकर 19 मिनट का समय सबसे अच्छा है। रात में 7 बजकर 36 मिनट पर चंद्रोदय होगा, जिसके बाद अर्घ्य दिया जाएगा।
Author: Pandit Balkrishan Sharma


