World/International: वैश्विक मंच पर चौतरफा चुनौतियों और अकेलेपन का सामना कर रहे इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को संकट के इस दौर में भारत की याद आई है। उन्होंने हाल ही में कबूल किया कि जहां दुनिया के कई बड़े देश इजरायल का बहिष्कार कर रहे हैं, वहीं भारत से उन्हें अटूट समर्थन और प्यार मिल रहा है।
इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत के लोगों से मिलने वाले इस डिजिटल और कूटनीतिक समर्थन को बेहद खास और अनूठा बताया है। नेतन्याहू ने पूरी दुनिया के सामने डंके की चोट पर कहा कि भले ही इजरायल को वैश्विक स्तर पर भारी विरोध का सामना करना पड़ रहा हो, लेकिन भारत की स्थिति पूरी तरह अलग है।
नेतन्याहू ने भावुक होते हुए कहा कि भारत में इजरायल के प्रति एक बिल्कुल क्रेजी लव (अटूट प्यार) देखने को मिल रहा है। वहां के लोग जिस तरह से सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर इजरायल का खुलकर समर्थन करते हैं, उसने अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच भी इजरायली सरकार के हौसले को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है।
सोशल मीडिया फॉलोअर्स पर जताई खुशी
इजरायली पीएम ने हंसते हुए और बेहद गर्व के साथ एक दिलचस्प आंकड़ा भी साझा किया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर उनके जितने फॉलोअर्स अकेले भारत से हैं, उतने दुनिया के किसी भी अन्य देश से नहीं हैं। यहां तक कि खुद उनके अपने देश इजरायल से भी इतने लोग उन्हें फॉलो नहीं करते हैं।
दरअसल, अमेरिका ने ईरान के साथ शांति समझौते (पीस डील) की शर्तों में ऐतिहासिक ‘अब्राहम एकॉर्ड’ को भी जोड़ दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मुस्लिम देशों से इस समझौते का हिस्सा बनने की पुरजोर अपील की है, ताकि इजरायल को मुस्लिम जगत में कूटनीतिक मान्यता मिल सके और वह अलग-थलग न पड़े।
साल 2020 में डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता से शुरू हुए इस अब्राहम एकॉर्ड समझौते के तहत यूएई, बहरीन, मोरक्को और सूडान ने इजरायल के साथ कूटनीतिक रिश्ते बहाल किए थे। लेकिन हालिया महीनों में मिडिल ईस्ट में छिड़ी भीषण जंग के बाद इन देशों के साथ इजरायल के रिश्तों की रफ्तार पर अचानक ब्रेक लग गया था।
सऊदी अरब और पाकिस्तान पर अमेरिका का दबाव
हालांकि, सऊदी अरब के साथ इजरायल के रिश्तों को सामान्य बनाने के लिए बैकचैनल के जरिए बातचीत अभी भी जारी है। लेकिन गाजा और लेबनान में चल रहे भीषण युद्ध के कारण यह डील फिलहाल ठंडे बस्ते में जाती दिख रही है। इसके अलावा अमेरिका, पाकिस्तान पर भी इस वैश्विक डील का हिस्सा बनने का लगातार दबाव बना रहा है।
मिडिल ईस्ट के ताजा हालातों को देखते हुए खाड़ी देशों की दिलचस्पी इस समय अब्राहम एकॉर्ड को आगे बढ़ाने में बहुत कम नजर आ रही है। यहां तक कि अमेरिकी प्रशासन और डोनाल्ड ट्रंप के साथ भी इजरायल की कुछ मुद्दों पर अनबन की खबरें लगातार सामने आ रही हैं, जिससे नेतन्याहू की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
ऐसे विपरीत समय में भारत की तटस्थ और संतुलित विदेश नीति के साथ-साथ भारतीय जनमानस का समर्थन इजरायल के लिए एक संजीवनी की तरह काम कर रहा है। यही वजह है कि बेंजामिन नेतन्याहू अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के साथ अपने कूटनीतिक रिश्तों की गहराई और दोस्ती का बखान करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं।
Author: Pallavi Sharma


