Delhi News: दैनिक जागरण भारत एजुकेशन कॉन्क्लेव 2026 में बीजेपी सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने भारतीय संस्कृति और इतिहास पर बड़े दावे किए हैं। उन्होंने कहा कि जो बातें आज की आधुनिक तकनीक यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) को भी नहीं पता हैं, उनका रहस्य हमारे प्राचीन वेदों में सदियों पहले से छिपा हुआ है।
अटल और मोदी सरकार ने तोड़ी औपनिवेशिक गुलामी की परंपरा
सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने बताया कि भारत को 1947 में किश्तों में अधूरी आजादी मिली थी। लंबे समय तक हमारे देश की तीनों सेनाओं के प्रमुख अंग्रेज ही रहे। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने शाम को बजट पेश करने की ब्रिटिश परंपरा को बदला। उन्होंने साल 1999 में पहली बार सुबह 11 बजे देश का बजट पेश किया था।
मोदी सरकार ने इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए बजट की तारीख में ऐतिहासिक बदलाव किए। साल 2017 से बजट 28 फरवरी के बजाय 1 फरवरी को पेश किया जाने लगा। त्रिवेदी के अनुसार हम अब धीरे-धीरे गुलामी की सभी पुरानी और औपनिवेशिक मानसिकताओं से पूरी तरह बाहर निकल रहे हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और चैटजीपीटी के ज्ञान की असली सीमा
सैम ऑल्टमैन से एक बार पूछा गया था कि क्या कोई ऐसा सवाल है जिसका जवाब चैटजीपीटी के पास नहीं है? उन्होंने कहा था कि आत्मा और ब्रह्म के पूर्ण संतुलन का जवाब एआई को नहीं पता। त्रिवेदी ने दावा किया कि यह गहरा आध्यात्मिक ज्ञान केवल हमारे भारतीय वेदों में ही मिलता है।
सप्ताह के दिनों के नामों का प्राचीन वैदिक श्लोक कनेक्शन
उन्होंने बताया कि सप्ताह शब्द संस्कृत से आया है जबकि हफ्ता एक पर्शियन शब्द है। हमारे शास्त्रों के श्लोकों में नवग्रहों की जो शांति प्रार्थना की जाती है, उसी से दिनों के नाम तय हुए। संडे और मंडे का यह पूरा विज्ञान सदियों पहले हमारे ऋषियों ने दुनिया को दिया था।
भारतीय वैज्ञानिकों के मौलिक अविष्कारों को नहीं मिला उचित क्रेडिट
बीजेपी सांसद ने मलाल जताते हुए कहा कि हमारे प्राचीन अविष्कारों का श्रेय विदेशी वैज्ञानिकों को दे दिया गया। हम सदियों से नौदुर्गा और त्योहारों में उपवास यानी व्रत रखते आए हैं। लेकिन साल 2016 में इसी खोज के लिए एक जापानी वैज्ञानिक को दुनिया का प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार मिल गया।
Author: Harikarishan Sharma

