Himachal Pradesh News: राज्य सरकार ने विकास कार्यों को रफ्तार देने के लिए खनन नियमों में बहुत बड़ा बदलाव किया है। इस नए फैसले से अब तीन बड़े सरकारी विभागों को निर्माण सामग्री जुटाने में बहुत बड़ी राहत मिल गई है। उद्योग विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी है।
खनन नियमों में संशोधन से विभागों को मिली बड़ी राहत
सरकार ने हिमाचल प्रदेश माइनर मिनरल्स नियम 2015 में 10वां संशोधन किया है। अब लोक निर्माण विभाग, जल शक्ति विभाग और हिमुडा 60 लाख रुपये तक के प्रोजेक्ट्स के लिए सीधे रेत, बजरी, पत्थर और रोड़ी का इस्तेमाल कर सकेंगे। पहले इन विभागों को लंबी औपचारिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता था।
इस जटिल प्रक्रिया के कारण ग्रामीण इलाकों में सड़कों, भवनों और पेयजल योजनाओं के काम लटक जाते थे। सरकार ने विकास कार्यों में होने वाली इसी देरी को खत्म करने के लिए यह अहम कदम उठाया है। अब अधिकारी सीधे जरूरत के हिसाब से स्थानीय स्तर पर सामग्री जुटा सकेंगे।
रॉयल्टी और जरूरी शुल्क चुकाने के बाद मिलेगी छूट
नई व्यवस्था के तहत विभागों को खुली छूट तो मिलेगी, लेकिन उन्हें तय नियम पूरे करने होंगे। इसके लिए संबंधित विभाग को पहले निर्धारित रॉयल्टी, प्रोसेसिंग फीस और अन्य सरकारी शुल्क जमा करवाने होंगे। इसके बाद ही वे बिना किसी रुकावट के निर्माण सामग्री का उठाव कर सकेंगे।
विभागों को काम शुरू करने से पहले निर्माण सामग्री की सटीक मात्रा तय करनी होगी। सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से दूरदराज के क्षेत्रों में चल रहे छोटे और मध्यम स्तर के विकास कार्यों को सबसे ज्यादा फायदा मिलेगा और सभी योजनाएं समय पर पूरी होंगी।
अवैध खनन रोकने के लिए कड़े नियमों का पालन जरूरी
अधिसूचना में साफ किया गया है कि इस खनिज सामग्री का उपयोग सिर्फ और सिर्फ सरकारी कामों के लिए होगा। अवैध खनन को रोकने और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त निर्देश दिए गए हैं। सभी विभागों को अपने खनिज उपयोग का पूरा रिकॉर्ड संबंधित अधिकारियों को देना होगा।
Author: Sunita Gupta


