इंस्टाग्राम के नए प्राइवेसी बदलाव से करोड़ों युवाओं की बढ़ी टेंशन, क्या अब आपकी पर्सनल चैट पढ़ेगा कोई तीसरा व्यक्ति?

Technology News: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम अब सिर्फ फोटो और रील्स देखने तक सीमित नहीं रहा। यह युवाओं की बातचीत, गहरी दोस्ती, रिलेशनशिप और कॉलेज ग्रुप का अहम हिस्सा बन चुका है। देश के लाखों युवा रोजाना घंटों इंस्टाग्राम के डायरेक्ट मैसेज (डीएम) पर बिताते हैं।

हाल ही में इंस्टाग्राम चैट सेक्शन में हुए बड़े बदलावों ने यूजर्स के बीच प्राइवेसी को लेकर नई टेंशन पैदा कर दी है। दरअसल चर्चा है कि टेक दिग्गज मेटा ने इंस्टाग्राम डीएम से जुड़े सिक्योरिटी सिस्टम को बदल दिया है। कंपनी ने अब बड़ा फैसला लिया है।

इंस्टाग्राम ने हटा दिया एंड टू एंड एन्क्रिप्शन फीचर

रिपोर्ट्स के मुताबिक इंस्टाग्राम ने अपने डीएम सेक्शन से एंड टू एंड एन्क्रिप्शन फीचर को हटाने का फैसला किया है। पहले इस खास फीचर को यूजर्स की चैट के लिए सबसे ज्यादा सेफ माना जाता था। इसके अचानक हटने से करोड़ों यूजर्स के मन में डर बैठ गया है।

एंड टू एंड एन्क्रिप्शन एक ऐसा मजबूत डिजिटल सुरक्षा कवच होता है, जिसमें सेंडर और रिसीवर ही मैसेज पढ़ सकते हैं। बीच में कोई तीसरा व्यक्ति या खुद कंपनी भी उस चैट को एक्सेस नहीं कर सकती। अब इस फीचर के गायब होने से प्राइवेसी पर सवाल उठ रहे हैं।

इस बड़े बदलाव के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर ‘डिजिटल जासूसी’ शब्द तेजी से वायरल हो रहा है। बहुत से यूजर्स का मानना है कि सोशल मीडिया ऐप्स पहले ही लोगों का काफी पर्सनल डेटा कलेक्ट करते हैं। अब प्राइवेसी कम होने से डर और ज्यादा बढ़ गया है।

यूजर्स का आरोप है कि ये ऐप्स उनकी पसंद, सर्च हिस्ट्री, लोकेशन और ऑनलाइन एक्टिविटी पर लगातार नजर रखते हैं। ऐसे में चैट की प्राइवेसी खत्म होना युवाओं के लिए बड़ा झटका है। कई साइबर एक्सपर्ट्स भी सुरक्षा के नजरिए से इसे सही नहीं मान रहे हैं।

मेटा ने प्राइवेसी बदलने के पीछे दिया यह तर्क

दूसरी ओर मेटा का कहना है कि बहुत कम लोग इस सिक्योरिटी फीचर का इस्तेमाल कर रहे थे। कंपनी के मुताबिक इस बदलाव के बाद संदिग्ध एक्टिविटीज और साइबर अपराधों पर नजर रखना काफी आसान हो जाएगा। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि भरोसा बनाए रखने के लिए चैट प्राइवेसी जरूरी है।

इस नए बदलाव के बाद युवाओं में कुछ मुख्य चिंताएं तेजी से बढ़ रही हैं:

  • चैट के असुरक्षित होने से पर्सनल बातें लीक होने का डर बढ़ गया है।
  • डेटा लीक होने की वजह से साइबर फ्रॉड का खतरा ज्यादा हो गया है।
  • प्राइवेसी खत्म होने से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भरोसा कम हो रहा है।
  • प्राइवेसी की इस नई टेंशन से युवाओं में मेंटल स्ट्रेस देखा जा रहा है।

इंटरनेट पर इस फैसले के खिलाफ बहस लगातार तेज हो रही है। कुछ लोग इसे सुरक्षा एजेंसियों के लिए अच्छा कदम बता रहे हैं। वहीं युवाओं का कहना है कि अगर उनकी पर्सनल बातें सुरक्षित नहीं रहेंगी, तो वे जरूरी चैट्स के लिए दूसरे ऐप्स का रुख करेंगे।

Author: Mohit

Hot this week

Related Articles

Popular Categories