Moscow News: ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध ने जहां पूरी दुनिया को गहरे संकट में डाल दिया है, वहीं रूस के लिए यह आपदा एक बड़ा अवसर साबित हो रही है। इस वैश्विक टकराव के बीच कच्चे तेल की रिकॉर्ड तोड़ बिक्री से मॉस्को की चांदी हो गई है।
वैश्विक बाजार में तेल की भारी मांग के कारण रूस की राष्ट्रीय मुद्रा ‘रूबल’ इस समय दुनिया की नंबर-वन करेंसी बनकर उभरी है। ब्लूमबर्ग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल महीने की शुरुआत से अब तक रूबल के मूल्य में करीब 12 फीसदी की भारी मजबूती देखी गई है।
फरवरी 2023 के बाद सबसे उच्चतम स्तर पर पहुंचा रूबल
लगातार मिल रहे आर्थिक फायदों के चलते वर्तमान में रूसी रूबल अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 72.6 के स्तर पर पहुंच गया है। वित्तीय विश्लेषकों के अनुसार, यह फरवरी 2023 के बाद का सबसे मजबूत स्तर है। तमाम विदेशी प्रतिबंधों के बावजूद रूबल लगातार दूसरे साल अपनी बढ़त बनाए हुए है।
इस अभूतपूर्व आर्थिक मजबूती के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती बिक्री सबसे मुख्य वजह है। युद्ध के कारण तेल की कीमतों में आए उछाल ने क्रेमलिन की तिजोरी को पूरी तरह भर दिया है। रूस को होने वाली इस बेतहाशा कमाई ने रूबल को वैश्विक स्तर पर शीर्ष पर पहुंचा दिया।
सख्त आर्थिक फैसलों और रणनीतियों से मिली बड़ी कामयाबी
रूस ने यूक्रेन युद्ध के दौरान भारी सरकारी खर्च को नियंत्रित करने के लिए अपनी ब्याज दरों को काफी ऊंचा रखा। इस सख्त मौद्रिक नीति के कारण देश के भीतर विदेशी मुद्रा की मांग में भारी कमी आई। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने भी अप्रत्यक्ष रूप से रूसी मुद्रा को सहारा दिया है।
रूस के अर्थव्यवस्था मंत्री मैक्सिम रेशेट्निकोव का मानना है कि उनका मौजूदा आर्थिक मॉडल आगे भी रूबल को मजबूत रखेगा। उन्होंने संकेत दिया कि यदि मिडिल ईस्ट में तनाव इसी तरह जारी रहा, तो कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ेंगी। इसके बाद रूबल मजबूत होकर 65-70 प्रति डॉलर तक आ सकता है।
इस बीच देश के बजट को लेकर क्रेमलिन पूरी तरह बेफिक्र नजर आ रहा है। रूसी वित्त मंत्री एंटोन सिलुनॉय ने स्पष्ट किया कि सरकार रूबल की इस रिकॉर्ड मजबूती से बिल्कुल परेशान नहीं है। तेल से होने वाली आय रूस की सभी बजटीय जरूरतों को आसानी से पूरा कर रही है।
Author: Pallavi Sharma


