New Delhi News: पश्चिम एशिया में जारी भीषण सैन्य संघर्ष के कारण वैश्विक व्यापार को बड़ा झटका लगा है। जहाजरानी मंत्रालय के अनुसार, इस अशांत क्षेत्र में जाने वाले माल के समुद्री भाड़ा शुल्क में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कंटेनरों के शिपिंग किराए में लगभग दस गुना की अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से पहले एलपीजी का औसत समुद्री भाड़ा 94 डॉलर प्रति टन था। यह 15 मई तक तेजी से बढ़कर 207 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गया है। इसके अलावा कच्चे तेल का भाड़ा भी 14 डॉलर से दोगुना होकर 28.6 डॉलर प्रति टन हो गया है।
कंटेनरों के किराए में दर्ज हुई रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि
इस क्षेत्रीय तनाव का सबसे बुरा असर कंटेनर शिपिंग पर देखने को मिला है। संघर्ष की शुरुआत से पहले प्रति ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट (TEU) का भाड़ा महज 203 डॉलर था। अब यह बढ़कर 2,000 डॉलर के पार पहुंच चुका है। इससे आयात-निर्यात करने वाले व्यापारियों की लागत बहुत बढ़ गई है।
भारतीय बंदरगाहों से जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट
पश्चिम एशिया में सुरक्षा का खतरा बढ़ने के कारण इस समुद्री मार्ग पर जहाजों की संख्या घट गई है। भारतीय बंदरगाहों से इस क्षेत्र के लिए होने वाली औसत मासिक शिपिंग सेवाएं बहुत कम हुई हैं। पहले जहां हर महीने 444 जहाजों का आवागमन होता था, वहीं अब यह घटकर केवल 125 रह गया है।
जहाजरानी मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने कहा कि सरकार इन बढ़ती कीमतों पर लगातार अपनी पैनी नजर बनाए हुए है। मंत्रालय ने शिपिंग दरों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक विशेष परामर्श भी जारी किया है। अधिकारियों के मुताबिक, युद्ध समाप्त होने के बाद ही इन दरों में बड़ी राहत मिल पाएगी।
Author: Rajesh Kumar


