Business News: वित्त आयोग के चेयरमैन अरविंद पनगढ़िया ने सोने के आयात पर ज्यादा ड्यूटी लगाकर उसे टारगेट करने के खिलाफ सरकार को बड़ी चेतावनी दी है। उनका तर्क है कि भारतीय रुपये को थोड़ा कमजोर होने देना देश के बढ़ते चालू खाता घाटे (CAD) को संभालने का ज्यादा असरदार तरीका होगा।
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री पनगढ़िया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उन सार्वजनिक अपीलों का पूरा समर्थन किया है, जिनमें उन्होंने लोगों से अपने व्यवहार में बदलाव लाने को कहा था। पीएम मोदी ने देशवासियों से कम यात्रा करने और वर्क फ्रॉम होम (WFH) को बढ़ावा देने की बात कही थी।
इंडिया टुडे टीवी के साथ एक विशेष इंटरव्यू में अरविंद पनगढ़िया ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जिस तरह से संकट के समय नैतिक अपील का सहारा लिया है, उससे उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा कि किसी भी बड़े नेता के लिए बचाव का यह हमेशा पहला तरीका होता है।
नीति आयोग के पहले उपाध्यक्ष रह चुके पनगढ़िया ने इस अपील की तुलना पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की 1965 की उस मशहूर अपील से की, जिसमें उन्होंने अनाज की भारी कमी के दौरान सभी भारतीयों से हफ्ते में कम से कम एक दिन उपवास रखने को कहा था।
सोने पर भारी ड्यूटी बढ़ाना आर्थिक रूप से बेअसर
पनगढ़िया ने साफ कहा कि सरकार ‘करंट अकाउंट डेफिसिट’ को लेकर काफी चिंतित दिखती है। लेकिन इस गंभीर समस्या का सही नीतिगत समाधान विनिमय दर (Exchange Rate) में बदलाव करना है। सरकार को किसी खास जरूरी चीज पर चुनिंदा तरीके से ड्यूटी बिल्कुल नहीं बढ़ानी चाहिए।
उन्होंने सुझाव दिया कि रुपये को बाजार के हिसाब से स्वाभाविक रूप से कमजोर होने दें। इससे सभी तरह के विदेशी आयात रुपये के मूल्य के लिहाज से थोड़े महंगे हो जाएंगे। इसके साथ ही रुपये के कमजोर होने से देश का निर्यात भी वैश्विक बाजार में ज्यादा आकर्षक हो जाएगा।
देश में तेजी से बढ़ सकती है सोने की तस्करी
गैर-जरूरी आयात को कम करने के लिए सरकार ने हाल ही में सोने-चांदी के आभूषणों पर 5% और प्लैटिनम पर 5.4% ड्यूटी बढ़ाई है। भारत का सोने का आयात रिकॉर्ड 72 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है। पनगढ़िया ने माना कि ज्यादा ड्यूटी से आधिकारिक आयात जरूर कम हो सकता है।
इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ी चेतावनी भी दी कि इस फैसले से देश में सोने की तस्करी और अनौपचारिक व्यापार को भारी बढ़ावा मिल सकता है। ड्यूटी बढ़ने से सोने की घरेलू कीमत बढ़ती है, जिससे चोर बाजार और तस्करी के रास्ते तेजी से सक्रिय हो जाते हैं।
ईंधन की कीमतों को बाजार के भरोसे छोड़ना बेहतर
पश्चिम एशिया के संकट और कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक कीमतों के बीच पीएम मोदी ने ईंधन बचाने पर काफी जोर दिया है। पनगढ़िया ने प्रशासनिक उपायों के मुकाबले बाजार-आधारित कीमतों को ज्यादा असरदार बताया। उन्होंने कहा कि पेट्रोल की कीमतें बाजार के अनुसार ही बढ़ने दी जानी चाहिए।
कीमतें बढ़ने पर भारतीय नागरिक खुद अपनी खपत में जरूरी कटौती करने लगेंगे। उन्होंने अमेरिका का उदाहरण दिया, जहां पेट्रोल की कीमत लगभग 50% बढ़कर 6 डॉलर तक पहुंच गई है। उन्होंने अंत में जोर दिया कि बाहरी आर्थिक असंतुलन को संभालने के लिए विनिमय दर में लचीलापन ही भारत का सबसे मजबूत हथियार है।
Author: Rajesh Kumar


