Business News: दिल्ली और मुंबई जैसे देश के बड़े शहरों में सोने की कीमतें वर्तमान में स्थिर बनी हुई हैं। ज्यादातर बाजारों में 24 कैरेट सोना अब करीब 1.58 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार कर रहा है। निवेश के नजरिए से यह स्थिरता आपके लिए एक बहुत अच्छा मौका हो सकती है।
अक्सर निवेशकों के सामने यह बड़ा सवाल होता है कि वे सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) चुनें या फिर गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF)। निवेश के इन दोनों आधुनिक विकल्पों के अपने अलग-अलग बड़े फायदे हैं। यह पूरी तरह आपकी वित्तीय जरूरतों और रिस्क लेने की क्षमता पर निर्भर करता है।
लंबी अवधि के निवेश और अतिरिक्त सालाना कमाई चाहने वालों के लिए SGB हमेशा से एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है। इसमें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) आपकी शुरुआती निवेश राशि पर 2.5 प्रतिशत का तय सालाना ब्याज देता है। हालांकि इसमें आठ साल का एक निश्चित लॉक-इन पीरियड होता है।
इस स्कीम की सबसे खास बात यह है कि मैच्योरिटी पर मिलने वाले कैपिटल गेन्स पर आपको कोई भी टैक्स नहीं देना पड़ता है। यह उन लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है जिन्हें तुरंत पैसों की जरूरत नहीं होती। इसमें फिजिकल गोल्ड की तरह चोरी का डर या लॉकर का भारी खर्च भी नहीं होता है।
शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग के लिए गोल्ड ETF सबसे कारगर
कम समय के लिए ट्रेडिंग करने या नियमित छोटी बचत करने वालों के लिए गोल्ड ETF काफी लचीला विकल्प साबित होता है। इन्हें आप शेयर की तरह स्टॉक मार्केट में अपनी जरूरत के हिसाब से कभी भी तुरंत खरीद या बेच सकते हैं। इसमें लिक्विडिटी बहुत ही ज्यादा देखने को मिलती है।
इसके उलट असली सोना यानी फिजिकल गोल्ड खरीदने पर ग्राहकों को भारी मेकिंग चार्ज और GST का बड़ा बोझ उठाना पड़ता है। साथ ही इसे पूरी तरह सुरक्षित रखने का खर्च भी आपकी जेब पर काफी भारी पड़ता है। यही वजह है कि डिजिटल विकल्प आज ज्यादा आकर्षक बन रहे हैं।
अपनी जरूरत के हिसाब से चुनें सही एसेट
सही विकल्प का चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितने समय के लिए निवेश करना चाहते हैं। अगर आप जब चाहें पैसा निकालना चाहते हैं, तो गोल्ड ETF सबसे बेस्ट डिजिटल माध्यम है। वहीं लंबे समय तक निवेश कर सुरक्षित ब्याज कमाने के लिए SGB को प्राथमिकता देनी चाहिए।
हालांकि शादी-ब्याह या त्योहारों पर गिफ्ट देने जैसे पारंपरिक कामों के लिए आज भी फिजिकल गोल्ड ही सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है। समझदार निवेशक हमेशा अपने रिस्क और रिटर्न के बीच सही तालमेल बिठाकर चलते हैं। अपने बजट का सही आकलन करके आप मुनाफे वाला रास्ता चुन सकते हैं।
Author: Rajesh Kumar


