पटना यूनिवर्सिटी में महासंग्राम: पीएचडी एडमिशन में धांधली के आरोप पर भूख हड़ताल पर बैठे छात्र, वीसी के खिलाफ खोला मोर्चा

Patna News: बिहार के प्रतिष्ठित पटना विश्वविद्यालय में पीएचडी नामांकन प्रक्रिया में कथित तौर पर हुई बड़ी धांधली को लेकर मचे घमासान के बीच छात्रों का उग्र विरोध प्रदर्शन और धरना लगातार जारी है। इंसाफ की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे गुस्साए छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर अनियमितता बरतने और जानबूझकर भेदभाव करने का सीधा आरोप मढ़ दिया है। इस कड़े विरोध के कारण पूरे विश्वविद्यालय परिसर में भारी तनाव का माहौल बना हुआ है।

दलित और महादलित समुदाय के होनहार छात्रों के भविष्य के साथ जानबूझकर हुआ खिलवाड़

इस बड़ी प्रशासनिक धांधली के खिलाफ कैंपस में भूख हड़ताल पर बैठे पीड़ित छात्र नेता विद्यानंद पासवान ने विश्वविद्यालय के शीर्ष अधिकारियों पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। छात्र नेता ने साफ शब्दों में कहा कि विश्वविद्यालय के वर्तमान कुलपति सीधे तौर पर दलित और महादलित समुदाय के होनहार छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उनका सीधा आरोप है कि इस बार की पीएचडी नामांकन प्रक्रिया में किसी भी तरह की पारदर्शिता नहीं अपनाई गई है।

प्रतिभाशाली और योग्य शोधार्थियों के साथ हुआ घोर अन्याय, कड़े आंदोलन की चेतावनी

पासवान ने विरोध दर्ज कराते हुए आगे कहा कि इस अपारदर्शी और भ्रष्ट व्यवस्था के कारण उच्च शिक्षा में जाने के इच्छुक कई बेहद प्रतिभाशाली और योग्य छात्रों के साथ घोर अन्याय हुआ है। यूनिवर्सिटी प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर चहेतों को फायदा पहुंचाया है। पीड़ित छात्रों ने चेतावनी दी है कि जब तक इस पूरी चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होकर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका यह अनशन समाप्त नहीं होगा।

तानाशाही और आकंठ भ्रष्टाचार से ग्रसित है पटना यूनिवर्सिटी की वर्तमान कार्यशैली

इस छात्र आंदोलन को अपना पूरा समर्थन देते हुए एआइएसएफ (AISF) के प्रान्तीय राज्य सचिव सुशील उमाराज ने विश्वविद्यालय प्रशासन को जमकर आड़े हाथों लिया। उन्होंने प्रेस वार्ता में विश्वविद्यालय की संपूर्ण वर्तमान कार्यशैली को पूरी तरह से तानाशाही और गहरे भ्रष्टाचार से ग्रसित बताया। छात्र नेता ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि कुलपति महोदय छात्रों की जायज और गंभीर समस्याएं सुनने के बजाय लोकतांत्रिक तरीके से चल रहे आंदोलन को बर्बरतापूर्वक दबाने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं।

कुलपति की सीधी निगरानी में हुई पीएचडी की धांधली, तय की जाए नैतिक जवाबदेही

सुशील उमाराज ने गंभीर कूटनीतिक आरोप लगाते हुए कहा कि पीएचडी नामांकन सूची में की गई यह बड़ी हेराफेरी सीधे कुलपति की नाक के नीचे और उनकी मौन निगरानी में संपन्न हुई है। इसलिए इस पूरे कथित घोटाले की मुख्य नैतिक जवाबदेही भी उन्हीं के ऊपर तय की जानी चाहिए। वामपंथी छात्र संगठन ने मांग की है कि राजभवन को तुरंत दखल देकर इस पूरी विवादित नामांकन प्रक्रिया को रद कर देना चाहिए, ताकि न्याय हो सके।

मजदूर नेताओं सहित भारी संख्या में छात्र संगठन के कार्यकर्ता धरने में हुए शामिल

विश्वविद्यालय परिसर में चल रहे इस अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन में छात्रों की एकजुटता लगातार बढ़ती जा रही है। इस कड़े संघर्ष में प्रीति पासवान, जाह्नवी राय के साथ ही एआइएसएफ की सक्रिय राज्य उपाध्यक्ष सबीना खातून भी मजबूती से डटी हुई हैं। इनके अलावा सत्यम कुमार, शिवम कुमार, अंकुश कुमार, दिनेश कुमार, रिंकल यादव और प्रख्यात मजदूर नेता रामजी यादव सहित सैकड़ों की संख्या में पीड़ित छात्र और वामपंथी कार्यकर्ता कुलपति कार्यालय के बाहर लगातार नारेबाजी कर रहे हैं।

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