तेजस फाइटर जेट की डिलीवरी में क्यों हो रही है देरी? वायुसेना की बढ़ी टेंशन, अगले महीने होगा बड़ा फैसला

Delhi News: भारतीय वायुसेना में लड़ाकू विमानों की कमी को दूर करने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ बड़ा करार हुआ था। इस समझौते के तहत 180 एलसीए तेजस मार्क 1ए विमानों की आपूर्ति होनी थी। हालांकि तय समयसीमा बीतने के बाद भी अब तक वायुसेना को एक भी एयरक्राफ्ट नहीं मिल सका है। रडार की कार्यक्षमता और तकनीकी प्रणालियों में सुधार के कारण मई महीने की अहम समीक्षा बैठक टल चुकी है।

जून की बैठक में तय होगी डिलीवरी की नई तारीख

रक्षा अधिकारियों के अनुसार अब जून महीने में एचएएल और वायुसेना के बीच एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक होने की संभावना है। इस बैठक में तेजस मार्क 1ए की डिलीवरी की अंतिम और संभावित तारीख तय हो सकती है। वायुसेना के सूत्रों ने स्पष्ट किया है कि विमान की ऑपरेशनल क्षमताओं से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। हालांकि एचएएल को कुछ गैर-जरूरी और तकनीकी बिंदुओं पर सीमित राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

रक्षा मंत्रालय के पाले में गेंद, तकनीकी सुधार पर काम जारी

एचएएल के साथ हुए इस मुख्य अनुबंध में किसी भी बड़े बदलाव की मंजूरी केवल रक्षा मंत्रालय स्तर पर ही मिल सकती है। पूर्व सीएमडी डॉ. डी. के. सुनील ने बताया था कि डिजाइन से जुड़े कुछ काम अभी बाकी हैं। इसी वजह से मई की बैठक को आगे बढ़ाना पड़ा। विमानों की समयसीमा पहले भी कई बार बढ़ चुकी है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए एचएएल के नए सीएमडी रवी कोटा ने दिल्ली में वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की है।

21 विमान तैयार, रडार और मिसाइल इंटीग्रेशन अंतिम चरण में

एचएएल के पास 21 तेजस विमान तैयार हैं, जिनका परीक्षण अमेरिकी कैट-बी इंजन के साथ सफलतापूर्वक किया जा चुका है। पिछली बैठकों में वायुसेना को बीवीआर मिसाइल, लेजर गाइडेड बम और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम के सफल इंटीग्रेशन की जानकारी दी गई थी। अब एचएएल को जून की बैठक में अपनी मेजर और माइनर ऑपरेशनल प्रगतियों की रिपोर्ट सौंपनी होगी। अगर सभी अनिवार्य शर्तें पूरी होती हैं, तभी आपूर्ति का रास्ता साफ हो पाएगा।

वायुसेना के टेस्ट पायलट करेंगे विमानों का कड़ा परीक्षण

तैयार विमानों को वायुसेना में शामिल करने से पहले एक बेहद सख्त निरीक्षण प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। एचएएल द्वारा निर्मित फाइटर जेट्स का सबसे पहले तकनीकी मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बाद वायुसेना के टेस्ट पायलट खुद इन विमानों को उड़ाकर इनकी क्षमताओं की जांच करेंगे। यह देखा जाएगा कि विमान एएसओआर मानकों पर पूरी तरह खरे उतरते हैं या नहीं। किसी भी तरह की कमी मिलने पर एचएएल को उसे तुरंत सुधारना होगा।

जनरल इलेक्ट्रिक से इंजन मिलने की रफ्तार हुई तेज

तेजस कार्यक्रम में देरी की एक मुख्य वजह अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक से इंजनों की आपूर्ति समय पर न मिलना भी रहा है। भारत ने वर्ष 2021 में जीई के साथ कुल 99 एफ404 इंजनों की खरीद के लिए समझौता किया था। अब धीरे-धीरे इन इंजनों की डिलीवरी शुरू हो गई है, जिससे उत्पादन में तेजी आने की उम्मीद है। फाइटर जेट्स की आपूर्ति में हो रहे विलंब को लेकर वायुसेना प्रमुख भी पहले अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं।

स्क्वाड्रन की भारी कमी से जूझ रही है भारतीय वायुसेना

मौजूदा समय में देश की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए भारतीय वायुसेना को कम से कम 42 फाइटर स्क्वॉड्रन की जरूरत है। इसके विपरीत वायुसेना वर्तमान में महज 29 स्क्वॉड्रन के भरोसे ही काम चला रही है। इस भारी कमी को पूरा करने के लिए तेजस विमानों की समय पर आपूर्ति बेहद जरूरी है। वायुसेना पहले ही 40 पुराने तेजस विमानों को अपनी सेवा में शामिल कर चुकी है, जिससे दो स्क्वॉड्रन तैयार किए गए हैं।

भविष्य में 9 नए स्क्वॉड्रन बनाने की है पूरी योजना

एचएएल के साथ पहले चरण में 83 एलसीए तेजस मार्क 1ए विमानों का सौदा हुआ था, जिससे चार नए स्क्वॉड्रन तैयार होने हैं। इसके बाद रक्षा मंत्रालय ने 97 अतिरिक्त तेजस मार्क 1ए विमानों की खरीद को भी मंजूरी दी थी। इन अतिरिक्त विमानों से वायुसेना के पांच और स्क्वॉड्रन मजबूत किए जाएंगे। तेजस परियोजना के तहत कुल 11 स्क्वॉड्रन देश की हवाई सुरक्षा संभालेंगे, जिनमें से 9 स्क्वॉड्रन का निर्माण अभी बाकी है।

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