CBSE का बड़ा खेल: कॉपियों की रीचेकिंग और फोटोकॉपी से कमाए 23 करोड़, RTI में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

Delhi News: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने पिछले शैक्षणिक सत्र 2024-25 में एक नया रिकॉर्ड बनाया है। बोर्ड ने कक्षा दसवीं और बारहवीं के छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं की रीचेकिंग और फोटोकॉपी के नाम पर करीब 23 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जुटाई है। इस बात का सनसनीखेज खुलासा प्रसिद्ध शिक्षाविद केशव अग्रवाल द्वारा दायर की गई एक आरटीआई (RTI) रिपोर्ट के जरिए हुआ है। बोर्ड की इस कमाई ने अब एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।

सूचना के अधिकार से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक शैक्षणिक सत्र 2024-25 में बोर्ड को दो अलग-अलग मदों से यह मोटी कमाई हुई है। कक्षा दसवीं और बारहवीं की परीक्षाओं के बाद उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल फोटोकॉपी उपलब्ध कराने के एवज में सीबीएसई को कुल 3 करोड़ 9 लाख रुपये मिले। वहीं, दूसरी तरफ इन्हीं दोनों कक्षाओं के मूल्यांकन और रीचेकिंग (Rechecking) के नाम पर छात्रों से करीब 20 करोड़ 9 लाख रुपये वसूले गए।

शिक्षकों की गलती का हर्जाना भुगत रहे अभिभावक

इस गंभीर मामले पर सवाल उठाते हुए शिक्षाविद केशव अग्रवाल ने बोर्ड की नीतियों को कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि आरटीआई से मिले आंकड़े बेहद हैरान करने वाले हैं। अधिकांश मामलों में देखा गया है कि दोबारा मूल्यांकन (Re-evaluation) कराने के बाद छात्रों के नंबर बढ़ जाते हैं। ऐसे में सीबीएसई के परीक्षकों की लापरवाही का खामियाजा छात्रों और उनके अभिभावकों को इतनी भारी फीस चुकाकर क्यों भुगतना पड़ रहा है।

शिक्षाविद केशव अग्रवाल का तर्क है कि अगर पुनर्मूल्यांकन के बाद किसी छात्र के अंकों में बढ़ोतरी होती है, तो यह सीधे तौर पर सीबीएसई के मूल मूल्यांकनकर्ता की बड़ी गलती को दर्शाता है। ऐसी स्थिति में बोर्ड की यह नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह पीड़ित छात्रों से ली गई पूरी आवेदन फीस तुरंत वापस करे। बोर्ड को अपनी जांच प्रणाली को दुरुस्त करना चाहिए ताकि छात्रों का पैसा और समय बर्बाद न हो।

रीचेकिंग और फोटोकॉपी के लिए तारीखों का एलान

इस बीच सीबीएसई ने मौजूदा सत्र के लिए जांची गई उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी प्राप्त करने की तारीखें घोषित कर दी हैं। छात्र 19 मई से 22 मई तक अपनी कॉपियों की डिजिटल प्रति के लिए ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं। बोर्ड ने इस विशेष सेवा के लिए 700 रुपये की फीस तय की है। इसके अतिरिक्त, पुनर्मूल्यांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन 26 मई से 29 मई तक स्वीकार किए जाएंगे।

बोर्ड की इस रीचेकिंग प्रक्रिया को पूरा करने के लिए छात्रों को कुछ जरूरी चरणों का पालन करना पड़ता है। सबसे पहले ‘मार्क्स वेरिफिकेशन’ होता है, जिसमें केवल अंकों के कुल जोड़ की दोबारा जांच की जाती है। इसकी फीस 500 रुपये प्रति विषय है। यदि छात्र संतुष्ट नहीं होते, तभी वे दूसरे चरण में 700 रुपये देकर आंसर शीट की डिजिटल फोटोकॉपी मांग सकते हैं। इसके बाद अंतिम चरण में रि-वैल्युएशन होता है।

अंतिम चरण यानी रि-वैल्युएशन की सुविधा केवल उन्हीं विषयों के लिए मिलती है, जिनकी फोटोकॉपी छात्र पहले मंगा चुके होते हैं। अगर डिजिटल कॉपी देखने के बाद छात्र को लगता है कि मार्किंग स्कीम के तहत किसी सवाल को सही से नहीं जांचा गया, तो वह चुनौती दे सकता है। बोर्ड इसके लिए प्रति सवाल 100 रुपये की दर से मूल्यांकन शुल्क वसूलता है। यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन संचालित होती है।

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