Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में बार-बार खराब बोर्ड परीक्षा परिणाम देने वाले शिक्षकों और प्राचार्यों की मुश्किलें अब बढ़ने वाली हैं। स्कूल शिक्षा विभाग ने ऐसे सभी लापरवाह स्टाफ की सालाना सैलरी इंक्रीमेंट (वेतन वृद्धि) रोकने का एक बड़ा और कड़ा फैसला लिया है। उच्च शिक्षा निदेशालय ने इस संबंध में राज्य के सभी जिला उपनिदेशकों को सख्त लिखित निर्देश जारी कर दिए हैं। इस फैसले से पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया है।
लापरवाह शिक्षकों की काली सूची तैयार करने के आदेश
विभाग ने जिला उपनिदेशकों को हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड परीक्षा में खराब प्रदर्शन करने वाले स्टाफ की एक विस्तृत सूची बनाने को कहा है। इस काली सूची में दसवीं और बारहवीं कक्षा का खराब परिणाम देने वाले प्रधानाचार्य, मुख्य अध्यापक, प्रवक्ता, टीजीटी और सीएंडवी शिक्षक शामिल किए जाएंगे। विभाग ने स्पष्ट किया है कि पिछली बार इन शिक्षकों को केवल सुधरने की अंतिम चेतावनी दी गई थी, लेकिन इस बार कड़ी दंडात्मक कार्रवाई तय है।
इस बार लापरवाही बरतने वाले शिक्षकों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने के साथ-साथ उनकी सर्विस बुक में भी इसकी नेगेटिव एंट्री की जाएगी। सर्विस बुक में एंट्री होने से भविष्य में उनके प्रमोशन और अन्य सरकारी लाभों पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। इसी कड़ी में शिमला जिले के सभी सरकारी उच्च और वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों के प्रमुखों को भी जिला उपनिदेशक कार्यालय की ओर से आवश्यक कदम उठाने के सख्त निर्देश मिल चुके हैं।
बोर्ड परीक्षा परिणामों के विस्तृत विश्लेषण के निर्देश
हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड ने मार्च की दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम घोषित कर दिए हैं। इसके तुरंत बाद हरकत में आए शिक्षा विभाग ने उन सभी स्कूलों का पूरा डेटा मांगा है, जिनका रिजल्ट तय मानकों से काफी कम रहा है। निदेशालय ने सभी स्कूल प्रमुखों को साल 2010, 2011 और 2014 में जारी सरकारी परिणाम मूल्यांकन नीति का गहराई से अध्ययन करने के निर्देश दिए हैं।
सभी सरकारी स्कूलों को कक्षा दसवीं और बारहवीं के परीक्षा परिणामों का एक व्यापक विश्लेषण तैयार करना होगा। स्कूल प्रमुख इस पूरी रिपोर्ट को एक निर्धारित प्रारूप में भरकर जिला कार्यालय और शिक्षा निदेशालय को जल्द भेजेंगे। विभाग ने साफ किया है कि कमजोर नतीजों के मामलों में नियमों के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। इसके लिए संबंधित स्कूल प्रभारियों और विषय शिक्षकों की सीधी जवाबदेही तय की जा चुकी है।

