World News: दुनिया भर के वैज्ञानिकों की नींद उड़ाने वाला एंडीज हंतावायरस (Andes Hantavirus) एक बार फिर तेजी से पैर पसार रहा है। हाल ही में एमवी होंडियस (MV Hondius) नामक क्रूज़ शिप पर इस खतरनाक वायरस का बड़ा हमला देखने को मिला है। इस आलीशान पानी के जहाज़ पर सवार यात्रियों में अचानक संक्रमण फैलने से हड़कंप मच गया। स्वास्थ्य एजेंसियों के अनुसार इस जानलेवा वायरस की चपेट में आने से अब तक 11 लोग गंभीर रूप से संक्रमित हो चुके हैं, जबकि 3 मरीजों की दर्दनाक मौत हो चुकी है।
क्रूज़ शिप पर कैसे फैला एंडीज हंतावायरस का संक्रमण?
अप्रैल महीने के दौरान एमवी होंडियस क्रूज़ शिप पर यात्रा कर रहे कई लोग अचानक रहस्यमय तरीके से बीमार पड़ने लगे। शुरुआती जांच के बाद मेडिकल टीमों ने पुष्टि की कि यह संक्रमण हंतावायरस के सबसे खतरनाक स्ट्रेन ‘एंडीज हंतावायरस’ के कारण फैला है। इसके तुरंत बाद अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रोटोकॉल के तहत सभी यात्रियों और क्रू मेंबर्स को सख्त निगरानी में रख दिया गया। वैज्ञानिक अब इस बात की गहनता से जांच कर रहे हैं कि जहाज़ पर वायरस का प्राथमिक स्रोत क्या था और यह इतनी तेजी से कैसे फैला।
इंसान से इंसान में फैलने की क्षमता ने बढ़ाई वैज्ञानिकों की चिंता
आमतौर पर हंतावायरस चूहों के जरिए इंसानों में फैलता है, लेकिन एंडीज हंतावायरस का यह स्ट्रेन बेहद अलग और खतरनाक है। वैज्ञानिकों के मुताबिक यह वायरस सिर्फ चूहों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बहुत आसानी से इंसान से इंसान में भी संक्रमित हो सकता है। हालिया वैज्ञानिक शोधों से यह परेशान करने वाले संकेत मिले हैं कि यह जानलेवा वायरस शरीर के विभिन्न तरल पदार्थों जैसे लार, स्तन के दूध और स्पर्म के जरिए भी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में प्रवेश कर सकता है।
संक्रमित मरीजों के शरीर में वायरस के सक्रिय रहने का बड़ा रहस्य
इस वायरस को लेकर चिकित्सा जगत के सामने सबसे बड़ी अनिश्चितता इसकी कार्यप्रणाली को लेकर बनी हुई है। विशेषज्ञ अभी तक यह सटीक अनुमान नहीं लगा पाए हैं कि यह वायरस इंसान के शरीर में कितने दिनों तक सक्रिय रहता है। इसके साथ ही यह भी रहस्य बना हुआ है कि ठीक होने के बाद भी कोई व्यक्ति कितने समय तक दूसरों को संक्रमित करने की क्षमता रखता है। यही वह मुख्य वैज्ञानिक सवाल है जिसका जवाब ढूंढने के लिए दुनिया भर की लैब्स रात-दिन काम कर रही हैं।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की विशेष टीम ने शुरू की नई स्टडी
विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ टीम इस समय एंडीज हंतावायरस पर विशेष शोध कर रही है। डब्ल्यूएचओ की उभरती बीमारियों की यह विशेष टीम वायरस के प्राकृतिक व्यवहार यानी नेचुरल हिस्ट्री को समझने की कोशिश में जुटी है। इस महत्वपूर्ण स्टडी के तहत क्वारंटाइन में रखे गए सभी संदिग्ध और संक्रमित लोगों के नियमित अंतराल पर सैंपल लिए जा रहे हैं। वैज्ञानिक यह पता लगा रहे हैं कि वायरस ठीक होने के बाद भी शरीर में छिपा रहता है या नहीं।
क्या ठीक हो चुके मरीज भी दोबारा फैला सकते हैं यह गंभीर बीमारी?
अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों के बीच इस समय सबसे बड़ी चिंता इसके दोबारा फैलने के तरीकों को लेकर है। अगर डब्ल्यूएचओ की स्टडी में यह साबित हो जाता है कि वायरस ठीक होने के बाद भी मरीज के शरीर में लंबे समय तक सक्रिय रह सकता है, तो स्थिति बेहद भयावह हो सकती है। इसका सीधा मतलब यह होगा कि पूरी तरह स्वस्थ दिख रहे मरीज भी अनजाने में समाज के अन्य लोगों को संक्रमित कर सकते हैं। इससे वैश्विक स्तर पर संक्रमण नियंत्रण प्रक्रिया काफी जटिल हो जाएगी।
एंडीज हंतावायरस का इलाज और इससे बचाव के लिए जरूरी सावधानियां
मेडिकल साइंस के पास फिलहाल इस खतरनाक एंडीज हंतावायरस का कोई सटीक और प्रामाणिक इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। अस्पतालों में डॉक्टरों की टीम मरीजों की जान बचाने के लिए केवल सहायक इलाज यानी सपोर्टिव केयर का ही सहारा ले रही है। इसके तहत गंभीर मरीजों को तत्काल ऑक्सीजन सपोर्ट दिया जाता है और उनके फेफड़ों की कार्यप्रणाली पर चौबीसों घंटे निगरानी रखी जाती है। इसके साथ ही दर्द और तेज बुखार को नियंत्रित करने के लिए जरूरी दवाएं दी जाती हैं।
आइसोलेशन और नए नियमों को लेकर आने वाले महीनों में होगा बड़ा फैसला
दुनिया भर के वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि आने वाले कुछ महीनों में डब्ल्यूएचओ की इस विशेष स्टडी के अंतिम नतीजे सामने आ जाएंगे। इन वैज्ञानिक आंकड़ों के आने के बाद ही वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियां नए और ठोस दिशा-निर्देश जारी कर सकेंगी। इन नतीजों के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि किसी भी संक्रमित व्यक्ति को कम से कम कितने दिनों तक अनिवार्य रूप से आइसोलेशन में रखना जरूरी है। इसके साथ ही भविष्य में क्रूज़ यात्राओं के लिए नए नियम भी बनाए जा सकते हैं।

