सुप्रीम कोर्ट की तीखी टिप्पणी: सीजेआई ने आखिर क्यों की बेरोजगार युवाओं की ‘कॉकरोच’ से तुलना? जानें इनसाइड स्टोरी

National News: भारत के सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी लॉ डिग्रियों और कानूनी पेशे से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान एक बेहद सख्त रुख अपनाया है। इस महत्वपूर्ण मामले की लाइव अदालती कार्यवाही के दौरान देश के मुख्य न्यायाधीश ने सोशल मीडिया और आरटीआई का दुरुपयोग करने वाले कुछ तत्वों पर तीखी टिप्पणी की। सीजेआई ने कहा कि कुछ बेरोजगार युवा जिन्हें कानूनी पेशे या अन्य क्षेत्रों में जगह नहीं मिलती, वे इंटरनेट मीडिया पर आकर हर किसी को निशाना बनाने लगते हैं।

आखिर सीजेआई ने सांप-बिच्छू के बजाय ‘कॉकरोच’ रूपक को क्यों चुना?

अदालती गलियारों और सोशल मीडिया पर अब यह सवाल उठ रहा है कि मुख्य न्यायाधीश ने इसके लिए ‘कॉकरोच’ शब्द का ही इस्तेमाल क्यों किया। न्यायशास्त्र और भाषा विज्ञान के विशेषज्ञों के अनुसार कॉकरोच शब्द को एक विशेष आचरण या व्यवहार को दर्शाने के लिए रूपक की तरह इस्तेमाल किया गया है। सांप या बिच्छू जैसे खतरनाक जीवों के विपरीत कॉकरोच को आमतौर पर गंदगी, छिपे हुए संक्रमण और उपेक्षित अंधेरी जगहों पर चुपचाप जीवित रहने से जोड़ा जाता है।

अंधेरे और गुमनामी के पीछे से काम करने की खतरनाक प्रवृत्ति

अदालत का यह इशारा उन लोगों की तरफ था जो अक्सर डिजिटल मंचों के पीछे छिपकर विभिन्न सरकारी संस्थानों को अपना निशाना बनाते हैं। सांप और बिच्छू जैसे शिकारी जीव अपने क्षेत्र की रक्षा के लिए सामने आकर सीधा हमला करते हैं। इसके विपरीत कॉकरोच नालियों, अंधेरे कोनों और छिपी हुई जगहों पर पनपते हैं। सीजेआई की टिप्पणी के मुताबिक कुछ लोग सोशल मीडिया पर गुमनाम अभियान और गलत सूचनाएं फैलाकर संवैधानिक व्यवस्था को दूषित कर रहे हैं।

नकारात्मक सोशल मीडिया एक्टिविज्म और तेजी से बढ़ती संख्या

यह सर्वविदित तथ्य है कि कॉकरोच बेहद गंदे वातावरण में बहुत कम समय के भीतर अपनी संख्या को कई गुना बढ़ा लेते हैं। मुख्य न्यायाधीश के बयान में इसी कड़वी सच्चाई का स्पष्ट रूप से जिक्र था। जो लोग अपने पेशेवर जीवन में स्थापित होने में पूरी तरह असफल रहते हैं, वे सुर्खियों में आने के लिए इस रास्ते को चुनते हैं। ये तत्व बाद में गंभीर विवाद, दुष्प्रचार, सनसनीखेज आरोप और सोशल मीडिया आधारित नकारात्मक एक्टिविज्म को बढ़ावा देते हैं।

संस्थानों की विश्वसनीयता को बिना वजह दूषित करने का बड़ा प्रयास

पारंपरिक रूप से सांप और बिच्छू को सीधे तौर पर मिलने वाली धमकियों और जहर के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इसके विपरीत कॉकरोच को एक ऐसे सामान्य कीट के रूप में देखा जाता है जो इंसानों को कोई रचनात्मक लाभ नहीं पहुंचाता। ये कीट केवल अपने आसपास के अच्छे माहौल को भी पूरी तरह से दूषित कर देते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि आरटीआई और डिजिटल मीडिया का ऐसा अनियंत्रित दुरुपयोग पूरे समाज और कानूनी तंत्र के लिए नुकसानदेह साबित हो रहा है।

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