धार भोजशाला पर हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, सदियों पुराना इंतजार खत्म और बदल गई पूरी व्यवस्था!

Madhya Pradesh News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने धार के ऐतिहासिक भोजशाला और कमाल मौला मस्जिद विवाद में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में हिंदू पक्ष के दावों को कानूनी रूप से सही माना है। इस बड़े फैसले के बाद अब यह पूरी तरह साफ हो गया है कि भोजशाला वास्तव में मां वाग्देवी का एक पवित्र मंदिर है। इस अदालती आदेश के साथ ही भोजशाला की वास्तविक पहचान को लेकर दशकों से चला आ रहा कानूनी और सामाजिक संघर्ष हमेशा के लिए समाप्त हो गया है।

अब हर दिन होगी पूजा, खत्म हुई पुरानी साप्ताहिक व्यवस्था

अदालत ने अपने नए आदेश के तहत उस पुरानी व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त कर दिया है जिसके तहत हिंदू समुदाय को केवल मंगलवार को ही यहां पूजा करने की अनुमति थी। अब देश के आम श्रद्धालु प्रतिदिन इस पवित्र परिसर में जाकर पूरे अधिकार के साथ नियमित पूजा-पाठ कर सकते हैं। कोर्ट का फैसला आने के अगले ही दिन सुबह से ही बड़ी संख्या में लोग भोजशाला मंदिर पहुंचने लगे हैं। शनिवार की सुबह भोज उत्सव समिति के प्रमुख पदाधिकारियों और आम श्रद्धालुओं ने वहां विशेष पूजा-अर्चना की।

श्रद्धालुओं ने किया हनुमान चालीसा का पाठ, महिलाओं में भारी उत्साह

इस विशेष अवसर पर मंदिर परिसर में उपस्थित सभी लोगों ने सामूहिक रूप से पूरी श्रद्धा के साथ हनुमान चालीसा का पाठ किया। सोशल मीडिया पर इस धार्मिक आयोजन का एक वीडियो भी तेजी से वायरल हो रहा है। बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु भी सुबह सवेरे मंदिर परिसर पहुंचीं। इन महिलाओं ने मां वाग्देवी की प्रतिमा पर सुंदर फूल-मालाएं चढ़ाईं और पूरी विधि-विधान से आरती उतारी। महिलाओं ने कहा कि वे पहली बार मंगलवार के अलावा किसी अन्य दिन इतनी स्वतंत्रता से पूजा कर पा रही हैं।

दिग्विजय सिंह के कार्यकाल में लगा था प्रवेश पर कड़ा प्रतिबंध

भोजशाला आंदोलन से लंबे समय से जुड़े दीपक बीड़कर ने इस पूरे विवाद के इतिहास पर महत्वपूर्ण प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि वह वर्ष 2003 से इस सांस्कृतिक और धार्मिक आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं। दीपक बीड़कर के अनुसार मध्य प्रदेश में दिग्विजय सिंह के तत्कालीन शासनकाल के दौरान ही इस ऐतिहासिक मंदिर परिसर में आम लोगों के प्रवेश पर कड़ा प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बाद 7 अप्रैल 2003 को भोजशाला को दोनों पक्षों के लिए खोला गया था।

हिंदू महासभा ने की भव्य मंदिर निर्माण की नई मांग

हिंदू महासभा के वरिष्ठ नेता अशोक जैन ने भी इस पवित्र स्थान के लिए किए गए लंबे संघर्ष के संस्मरण साझा किए। उन्होंने मंदिर परिसर में बने प्राचीन स्तंभों और धार्मिक चिह्नों को दिखाते हुए दावा किया कि ये सारे सुबूत इसके हिंदू मंदिर होने की पुष्टि करते हैं। अशोक जैन ने कहा कि इतिहास में इन प्राचीन चिह्नों को मिटाने की कई कोशिशें की गईं। उन्होंने मांग की है कि हाई कोर्ट का अंतिम फैसला आने के बाद अब यहां एक भव्य और विशाल मंदिर का निर्माण किया जाना चाहिए।

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