International News: वैश्विक इंटरनेट व्यवस्था पर एक बहुत बड़ा संकट मंडरा रहा है। पूरी दुनिया का 95 प्रतिशत से अधिक अंतरराष्ट्रीय डाटा समुद्र के नीचे बिछी करीब 500 अंडरसी केबल्स के माध्यम से संचालित होता है। अब इन्हीं संचार केबल्स को लेकर ईरान के एक हालिया बयान ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ईरान समर्थित मीडिया संस्थानों ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली इंटरनेट केबल कंपनियों पर भारी शुल्क लगाने का एक नया प्रस्ताव दिया है।
डिजिटल चोकपाइंट बने दुनिया के प्रमुख समुद्री रास्ते
ईरान ने चेतावनी दी है कि ये समुद्री केबल्स पश्चिम एशिया की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद संवेदनशील हैं। वर्तमान समय में रेड सी, बाब अल-मंदेब, स्वेज नहर और होर्मुज जैसे रणनीतिक जलमार्ग अब सिर्फ तेल व्यापार तक सीमित नहीं हैं। ये रास्ते अब दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल चोकपाइंट बन चुके हैं। यूरोप, एशिया और अफ्रीका महाद्वीप के बीच होने वाली सभी मुख्य आर्थिक गतिविधियां और इंटरनेट संचार पूरी तरह इन्हीं रास्तों पर निर्भर करते हैं।
पिछले संकट से सहम गई है पूरी वैश्विक व्यवस्था
पिछले साल रेड सी में अंडरसी केबल्स को भारी नुकसान पहुंचा था। इस दुर्घटना के कारण यूरोप और एशिया के बीच करीब 25 प्रतिशत इंटरनेट ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया था। यही मुख्य वजह है कि दुनिया का कोई भी देश ईरान की इस नई आर्थिक टिप्पणी को हल्के में नहीं ले रहा है। रक्षा और तकनीकी विशेषज्ञों का मानना है कि ये अंडरसी केबल्स अब किसी भी देश की तेल पाइपलाइन या बिजली ग्रिड जितनी ही महत्वपूर्ण रणनीतिक संपत्ति बन चुकी हैं।
एक दुर्घटना से सेना और बैंकिंग क्षेत्र में मचेगा हड़कंप
सबसे बड़ा भू-राजनीतिक खतरा यह है कि दर्जनों महत्वपूर्ण केबल्स एक ही संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरती हैं। ऐसे में यदि किसी एक क्षेत्र में हमला या तोड़फोड़ होती है, तो कई देशों का इंटरनेट एक साथ बंद हो जाएगा। इसका सीधा असर केवल सोशल मीडिया पर नहीं पड़ेगा। अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग, शेयर बाजार, ऑनलाइन भुगतान, सैन्य संचार, ड्रोन ऑपरेशन और वैश्विक व्यापार इसकी चपेट में आकर पूरी तरह से तबाह हो सकते हैं।
विकासशील देशों पर मंडरा रहा है सबसे बड़ा खतरा
इस संभावित डिजिटल संकट से अफ्रीका, पश्चिमी और दक्षिण एशिया के कई विकासशील देश सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। इन देशों के पास आपात स्थिति से निपटने के लिए कोई वैकल्पिक नेटवर्क उपलब्ध नहीं है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट में यह चेतावनी भी दी गई है कि समुद्र के गहरे पानी में होने वाली तोड़फोड़ को साबित करना लगभग असंभव होता है। यह अस्पष्टता आने वाले समय में दुनिया के शक्तिशाली देशों के बीच बड़े सैन्य तनाव की वजह बन सकती है।


