‘विपक्ष का नेता रबर स्टैंप नहीं’: CBI डायरेक्टर चयन प्रक्रिया से राहुल गांधी हुए बाहर, PM मोदी को लिखा कड़ा पत्र

New Delhi News: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीबीआई डायरेक्टर की चयन प्रक्रिया से खुद को अलग कर लिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर अपनी गहरी असहमति दर्ज कराई है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया है कि वह किसी पक्षपातपूर्ण प्रक्रिया का हिस्सा बिल्कुल नहीं बनेंगे। उन्होंने कहा कि विपक्ष का नेता कोई रबर स्टैंप नहीं होता है। इस बड़े सियासी कदम से कई सवाल खड़े हुए हैं।

राहुल गांधी मंगलवार को अगले सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति बैठक में हिस्सा लेने प्रधानमंत्री आवास पहुंचे थे। इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रधानमंत्री मोदी और सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस सूर्यकांत भी मौजूद थे। हालांकि कुछ ही देर बाद राहुल गांधी बैठक से बाहर निकल गए। इसके तुरंत बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री को भेजा गया अपना पत्र साझा किया। उन्होंने लिखा कि इस पूरी प्रक्रिया में भाग लेकर वह अपने संवैधानिक कर्तव्यों का उल्लंघन नहीं कर सकते।

सीबीआई डायरेक्टर की चयन प्रक्रिया और नियम

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई के डायरेक्टर का चुनाव हमेशा एक तीन सदस्यीय पैनल करता है। इस विशेष समिति के अध्यक्ष देश के प्रधानमंत्री होते हैं। उनके अलावा लोकसभा के नेता विपक्ष और भारत के मुख्य न्यायाधीश इसका हिस्सा होते हैं। मुख्य न्यायाधीश की अनुपस्थिति में उनके द्वारा नामित कोई अन्य सुप्रीम कोर्ट जज इसमें शामिल होता है। यह समिति ही देश की बड़ी जांच एजेंसी के मुखिया का अंतिम चयन करती है।

यह कोई पहला मौका नहीं है जब राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति का सीधा बहिष्कार किया हो। इससे पहले मुख्य सूचना आयुक्त राज कुमार गोयल की चयन प्रक्रिया से भी उन्होंने खुद को पूरी तरह अलग कर लिया था। ऐसे कड़े कदमों से सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव साफ दिखाई देता है। राहुल गांधी लगातार ऐसी समितियों की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर कड़े सवाल उठाते रहे हैं।

वर्तमान में सीबीआई डायरेक्टर की जिम्मेदारी वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी प्रवीण सूद संभाल रहे हैं। वह 1986 बैच के अफसर हैं और उन्होंने 25 मई 2023 को अपना पदभार ग्रहण किया था। उनका मूल कार्यकाल मई 2025 में खत्म होना था। हालांकि केंद्र सरकार ने उन्हें एक साल का सेवा विस्तार दे दिया था। उनका बढ़ा हुआ कार्यकाल अब 24 मई 2026 को समाप्त होने जा रहा है। इसी वजह से नए डायरेक्टर की तलाश तेज हुई है।

सीबीआई प्रमुख पद के प्रमुख दावेदार

नए सीबीआई बॉस के लिए सरकार ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की एक खास शॉर्टलिस्ट तैयार की है। इसमें मुख्य रूप से 1989 से 1992 बैच के कई अनुभवी अधिकारी शामिल हैं। इस रेस में रिसर्च एंड एनालिसिस विंग के डायरेक्टर पराग जैन का नाम सबसे आगे चल रहा है। उनके अलावा अजय कुमार शर्मा, महाराष्ट्र के डीजीपी सदानंद दाते और सीआरपीएफ के महानिदेशक जीपी सिंह भी इस पद के प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं।

सीबीआई भारत की सबसे प्रमुख और ताकतवर जांच एजेंसी मानी जाती है। इसके डायरेक्टर पद की जिम्मेदारी बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण होती है। यह केंद्रीय एजेंसी देश भर में भ्रष्टाचार और अन्य गंभीर मामलों की निष्पक्ष जांच करती है। इसलिए इसके मुखिया का चुनाव पूरी तरह से पारदर्शी होना चाहिए। विपक्ष अक्सर सरकार पर जांच एजेंसियों के गलत इस्तेमाल का आरोप लगाता रहता है। राहुल गांधी का ताजा कदम इसी विवाद का हिस्सा है।

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